छपरा. काम के अधिकार की रक्षा के लिए कांग्रेस पार्टी आठ जनवरी से 25 फरवरी तक राष्ट्रव्यापी अभियान चलायेगी. यह जानकारी पार्टी के प्रदेश प्रकवात नदीम अंसारी ने दी. उन्होंने कहा की कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ने निर्णय लिया है कि मनरेगा बचाओ संग्राम किया जायेगा. अंसारी ने बताया कि 2005 में यूपीए सरकार द्वारा लागू किया गया मनरेगा एक अधिकार-आधारित कानून है. जो प्रत्येक ग्रामीण परिवार को मजदूरी रोजगार की मांग करने का वैधानिक अधिकार देता है. कानून के तहत राज्य सरकार 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है. अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देय होता है. यही वैधानिक गारंटी मनरेगा की मूल और परिभाषित विशेषता है. यह ग्रामीण आजीविका सुरक्षा की रीढ़ रहा है. यह प्रतिवर्ष 5-6 करोड़ परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराता है. मजबूरी में होने वाले पलायन को कम करता है. ग्रामीण मजदूरी बढ़ाता है और टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियों का निर्माण करता है. इसकी मांग-आधारित संरचना, सुनिश्चित मजदूरी और सीधे बैंक भुगतान की व्यवस्था से विशेष रूप से महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और वंचित समुदायों को लाभ हुआ है. नया वीएम-ग्राम-जी अधिनियम इस पूरे ढांचे से मौलिक विचलन है. यह काम की वैधानिक गारंटी को समाप्त करता है. निर्णय प्रक्रिया का केंद्रीकरण केंद्र सरकार के हाथों में करता है. कार्यक्रम से महात्मा गांधी के नाम को हटाया जाना भी श्रम की गरिमा और ग्राम स्वराज के उन मूल्यों को कमजोर करने का प्रयास दर्शाता है. जिन पर मनरेगा आधारित है. ग्रामीण आजीविकाओं पर इस गंभीर हमले की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस ने मनरेगा बचाओ संग्राम नामक राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है.
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