Saran News : स्थानीय जामा मस्जिद में शनिवार की देर रात पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर आधारित भव्य ‘सीरत-ए-नबी जलसा’ का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में सभी धर्मों के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. इस दौरान सामाजिक सौहार्द, आपसी भाईचारे और सर्वधर्म समभाव की मिसाल देखने को मिली.
गणमान्य लोगों ने फीता काटकर किया कार्यक्रम का उद्घाटन
कार्यक्रम का उद्घाटन जामा मस्जिद के सदर डॉ. फरजंद अहमद, अल्ताफ आलम राजू, ठाकुर अमर सिंह, ललन राय, विष्णु गुप्ता, फैयाज अहमद और मोहम्मद अली समेत कई गणमान्य लोगों ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया. कार्यक्रम की शुरुआत मस्जिद के इमाम नसरुद्दीन साहब की तकरीर से हुई.
जलसे में मौलाना नूर मोहम्मद कादरी, मौलाना गुलाम मोहम्मद मोहिउद्दीन शाह, मौलाना हसनैन, नशर अहमद, हाफिज सलीम, मौलाना सादिक राजा और सीवान के मौलाना फिदाउल हक चतुर्वेदी समेत कई धर्मगुरुओं ने अपने विचार रखे.
मानवता, प्रेम और शांति को प्राथमिकता देने की अपील
वक्ताओं ने हजरत मोहम्मद साहब के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए मानवता, प्रेम, शांति और जरूरतमंदों की मदद को समाज की प्राथमिकता बनाने का आह्वान किया. वक्ताओं ने कहा कि पैगंबर साहब की शिक्षाएं किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरी मानवता के लिए प्रेरणा देती हैं.
गरीब बच्चों की पढ़ाई में सहयोग करने की अपील
मौलाना नशर अहमद ने समाज के सक्षम लोगों और मस्जिद कमेटियों से गरीब एवं जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा में सहयोग करने की अपील की. उन्होंने कहा कि यदि हर गांव और मोहल्ले के जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई में समाज सहयोग करे, तो बड़ी संख्या में बच्चे आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर, अधिवक्ता और आईएएस जैसे उच्च पदों तक पहुंच सकते हैं.
जलसे ने दिया आपसी एकता का संदेश
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही. आयोजन के माध्यम से समाज में आपसी प्रेम, एकता और भाईचारे का संदेश दिया गया. विभिन्न समुदायों के लोगों की सहभागिता ने क्षेत्र में सामाजिक सौहार्द और सर्वधर्म समभाव की भावना को मजबूत किया.
