घर-घर होगी कालाजार के संभावित मरीजों की खोज, आशा कार्यकर्ताओं को दिया जाएगा विशेष प्रशिक्षण : सिविल सर्जन

कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य को आगे भी उसी स्तर पर बनाये रखने के लिये स्वास्थ्य विभाग प्रतिबद्ध है.

छपरा. कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य को आगे भी उसी स्तर पर बनाये रखने के लिये स्वास्थ्य विभाग प्रतिबद्ध है. जिले में कालाजार के संभावित मरीजों की खोज के लिये आशा कार्यकर्ता दशत देंगी.घर-घर जाकर मरीजों की खोज की जायेगी. राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम, भारत सरकार के निर्देश के आलोक में कालाजार, पीकेडीएल और एचआईवी-वीएल के संभावित मरीजों की पहचान के लिये प्रभावित राजस्व गांवों में घर-घर सर्वे कराया जायेगा.इस कार्य के लिये आशा कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जायेगा. 200 से 250 घरों में सर्वे किया जायेगा.स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्ष 2021, 2022, 2023, 2024 तथा वर्ष 2025 के नवंबर तक जिन क्षेत्रों में कालाजार के मरीज पाये गये हैं. वहां विशेष रूप से रोगी खोज अभियान चलाया जायेगा. ऐसे मरीजों के घर के चारों दिशाओं में स्थित 50-50 घरों में जाकर संभावित मरीजों की पहचान की जायेगी.इस प्रकार एक मरीज के आसपास अधिकतम 200 से 250 घरों में सर्वे किया जायेगा. इन लक्षणों पर होगी विशेष नजर अभियान के दौरान आशा कार्यकर्ता उन लोगों की पहचान करेंगी जिन्हें 15 दिनों या उससे अधिक समय से बुखार हो और मलेरिया या एंटीबायोटिक दवा लेने के बाद भी बुखार ठीक न हुआ हो. इसके साथ ही भूख में कमी, शरीर में कमजोरी तथा पेट का असामान्य रूप से बढ़ना जैसे लक्षणों पर भी ध्यान दिया जायेगा. ऐसे व्यक्तियों को आरके-39 किट से जांच के लिये प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा जायेगा.

पूर्व में कालाजार पीड़ितों पर भी निगरानी

स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश दिया है कि यदि किसी व्यक्ति का पहले कालाजार का इलाज हो चुका है, लेकिन उसे फिर से बुखार के साथ कालाजार के लक्षण दिखाई देते हैं तो आशा कार्यकर्ता उसे जांच के लिये सदर अस्पताल रेफर करेंगी और उसका नाम रेफरल पर्ची में दर्ज किया जायेगा.इसी प्रकार यदि किसी व्यक्ति को बुखार नहीं है लेकिन शरीर की त्वचा पर चकत्ते या दाग दिखाई देते हैं और वह पहले कालाजार से पीड़ित रह चुका है तो उसे भी जांच के लिये प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा जायेगा.इन सभी मामलों की प्रविष्टि रजिस्टर और रेफरल पर्ची में अनिवार्य रूप से की जायेगी. वहीं वीडीसीओ सतीश कुमार ने बताया कि एक आशा कार्यकर्ता प्रतिदिन अधिकतम 50 घरों में ही सर्वे करेगी. यदि वह कुल 250 घरों में संभावित मरीजों की खोज का कार्य पूरा करती है, तो उसे एकमुश्त दो सौ रुपये प्रोत्साहन राशि दी जायेगी.वहीं आशा फैसिलिटेटर को तीन सौ रुपये की दर से भुगतान किया जायेगा.जो स्थानीय स्तर पर एसएनए के माध्यम से किया जायेगा.

पर्यवेक्षण और प्रशिक्षण की व्यवस्था

आशा कार्यकर्ताओं के कार्यों का पर्यवेक्षण आशा फैसिलिटेटर द्वारा किया जायेगा.साथ ही पीरामल स्वास्थ्य के पीएलसीडी तथा वीडीसीओ, वीबीडी कंसल्टेंट द्वारा आशा कार्यकर्ताओं को उन्मुखीकरण एवं प्रशिक्षण दिया जायेगा. ताकि अभियान प्रभावी तरीके से चलाया जा सके.रोगी खोज अभियान शुरू करने से पहले संबंधित गांव के मुखिया को इसकी जानकारी दी जाये. अभियान के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों से भी सहयोग लिया जायेगा.जिससे घर-घर सर्वे में आसानी हो सके. कंट्रोल रूम को भेजी जायेगी प्रतिदिन रिपोर्ट जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ भूपेंद्र कुमार ने बताया कि अभियान के दौरान आशा कार्यकर्ताओं द्वारा प्रतिदिन चिन्हित किये गये संभावित मरीजों की संख्या, आरके-39 किट से हुई जांच और पॉजिटिव मामलों की जानकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से जिला स्तर पर स्थित कंट्रोल रूम को भेजी जायेगी.

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By ALOK KUMAR

ALOK KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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