Chapra Passenger Stop : छपरा शहर से रोजाना करीब 2000 यात्री अलग-अलग जिलों और दूसरे राज्यों के लिए सफर शुरू करते हैं. लेकिन यात्रा से पहले उन्हें जिस परेशानी से गुजरना पड़ता है, वह शहर की यात्री व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है. शहर के पांच प्रमुख यात्री पड़ावों पर बैठने, पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. गर्मी, बारिश और सर्दी में सड़क किनारे खड़े होकर बस का इंतजार करना यात्रियों की मजबूरी बन गया है.
दशकों से बदहाल हैं छपरा के यात्री पड़ाव
शहर के सरकारी बस स्टैंड, सांढ़ा ढाला बस स्टैंड, गांधी चौक, नेहरू चौक और अन्य पुराने या अस्थायी यात्री पड़ावों से रोजाना बड़ी संख्या में बसें और सवारी वाहन अलग-अलग शहरों के लिए रवाना होते हैं. इन जगहों से पटना, मुजफ्फरपुर, सीवान, गोपालगंज, आरा, बेतिया, मोतिहारी, बलिया, बोकारो, टाटा, धनबाद, रांची और सिलीगुड़ी तक के लिए यात्री सफर करते हैं.
दिल्ली तक शुरू हुई बस सेवा, लेकिन सुविधाएं जस की तस
छपरा सरकारी बस स्टैंड से करीब तीन वर्ष पहले नई दिल्ली के लिए भी बस सेवा शुरू की गई थी. इससे लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए विकल्प बढ़ा, लेकिन यात्री पड़ावों की बुनियादी सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका. कई जगह आज भी यात्रियों को सड़क किनारे खड़े होकर वाहनों का इंतजार करना पड़ता है.
पांच यात्री पड़ावों पर रोजाना हजारों यात्रियों की आवाजाही
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार शहर में करीब पांच प्रमुख यात्री पड़ाव हैं. यहां से रोजाना लगभग 50 बसें और अन्य डेली सर्विस वाहन चलते हैं. इन पड़ावों से करीब 2000 यात्रियों की रोजाना आवाजाही होती है. इनमें दूसरे जिलों और प्रदेशों से छपरा पहुंचने वाले करीब 500 से 700 यात्री भी शामिल हैं.
सड़क किनारे परिवार के साथ बस का इंतजार करने की मजबूरी
सांढ़ा बस स्टैंड, सरकारी बस स्टैंड और दारोगा राय चौक के आसपास बने अस्थायी यात्री पड़ावों पर अक्सर यात्रियों को सड़क किनारे खड़े होकर वाहनों का इंतजार करना पड़ता है. परिवार और सामान के साथ खड़े यात्रियों के लिए यह स्थिति और मुश्किल हो जाती है.
बारिश में सड़क का पानी बढ़ाता है परेशानी
बरसात के दिनों में यात्री पड़ावों की स्थिति और खराब हो जाती है. सड़क पर जमा पानी से कीचड़ और गंदगी बढ़ जाती है. तेज गति से गुजरने वाले चार पहिया वाहनों से पानी के छींटे यात्रियों पर पड़ते हैं. ऐसे में यात्रियों के लिए बस का इंतजार करना काफी असुविधाजनक हो जाता है.
गर्मी और सर्दी में भी नहीं मिलती राहत
यात्री पड़ावों पर पर्याप्त शेड और बैठने की व्यवस्था नहीं होने से मौसम की मार सीधे यात्रियों को झेलनी पड़ती है. गर्मी में धूप के बीच इंतजार करना पड़ता है, जबकि सर्दी और बारिश में भी सुरक्षित और आरामदायक प्रतीक्षा स्थल की कमी महसूस होती है.
महिलाओं के लिए परेशानी और ज्यादा
यात्री पड़ावों की अव्यवस्था का असर महिलाओं पर भी पड़ता है. कई जगह महिला यात्रियों के लिए अलग से जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. शौचालय और पेयजल की सुविधा का अभाव लंबी दूरी की यात्रा करने वाली महिलाओं के लिए बड़ी समस्या बन जाता है.
बसों में भी सुविधाओं की कमी से बढ़ती मुश्किल
परेशानी सिर्फ यात्री पड़ाव तक सीमित नहीं है. कुछ निजी सवारी वाहनों और बसों में भी साफ-सफाई और रखरखाव की कमी की शिकायत रहती है. यात्रियों के अनुसार कई बसें जर्जर हालत में दिखती हैं और उनमें गंदगी भी रहती है.
रिजर्व सीट और सुरक्षा को लेकर भी सवाल
महिला यात्रियों के लिए आरक्षित सीटों पर कई बार पुरुष यात्रियों के बैठने की शिकायत सामने आती है. वहीं निजी बसों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की बात कही जाती है. इससे अकेले या बच्चों के साथ यात्रा करने वाली महिलाओं की परेशानी बढ़ जाती है.
बच्चों का उत्साह भी पड़ाव की अव्यवस्था में पड़ जाता है फीका
दूसरे प्रदेशों से अपने घर लौट रहे बच्चों में परिवार से मिलने को लेकर खास उत्साह रहता है. लेकिन यात्री पड़ाव पर पहुंचते ही यह उत्साह परेशानी में बदल जाता है. बस में चढ़ने की आपाधापी, दुर्गंध, कीचड़ और इंतजार के लिए उचित जगह नहीं होने से बच्चों को भी काफी परेशानी होती है.
रोजाना हजारों यात्रियों की निर्भरता, फिर भी बुनियादी सुविधा का इंतजार
छपरा के यात्री पड़ाव सिर्फ शहर के लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि आसपास के प्रखंडों और पड़ोसी जिलों के यात्रियों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं. रोजाना हजारों लोगों की निर्भरता के बावजूद इन जगहों पर बुनियादी यात्री सुविधाओं की कमी लंबे समय से बनी हुई है.
डिप्टी मेयर ने कहा, सुविधाएं बेहतर बनाने का प्रयास जारी
छपरा नगर निगम की डिप्टी मेयर रागिनी देवी ने कहा कि शहर के यात्री पड़ावों पर साफ-सफाई और अन्य इंतजाम बेहतर करने के लिए प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि विभिन्न माध्यमों से यात्री पड़ावों को सुविधा संपन्न बनाने का काम किया जाना है.
