कुव्यवस्था. प्रखंड स्तर के 24 में से महज 10 पदाधिकारी ही कार्यरत
छपरा (सदर) : जिले में श्रमिकों के कल्याण एवं बाल श्रमिकों को मुक्त कराकर उन्हें मुख्य धारा से जोड़ने का सरकारी प्रयास रूक सा गया है. इसकी वजह श्रम विभाग के 75 फीसदी प्रमंडल, जिला एवं प्रखंड स्तर के पदाधिकारियों का पद रिक्त होना है. ऐसी स्थिति में एक ओर जहां श्रमिकों की कल्याण की योजनाएं जहां पर्यवेक्षण एवं पर्याप्त निर्देश के अभाव में कार्यान्वित नहीं हो पा रही है.
वहीं छोटे-छोटे बच्चे शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक पढ़ने एवं चिंता मुक्त होकर अपना जीवन व्यतीत करने के बदले चौक-चौराहों पर एवं कचरे के ढेर, होटलों, गाड़ियों के गैरेज आदि में सुबह से शाम तक अपना भविष्य तलाशते दिखते है. लेकिन, पदाधिकारी के अभाव में श्रम विभाग का धावा दल ऐसे बच्चों से काम कराने वालों तथा पेट पालने के लिए कचरा के ढेर पर तलाशने से रोकने का प्रयास नहीं कर पा रहा है.
उप श्रम अधीक्षक, सहायक श्रमायुक्त, श्रम अधीक्षक समेत 14 के पद रिक्त :
श्रम विभाग में कल्याण की योजनाओं के कार्यान्वयन, मृत या घायल मजदूरों के दावा आपत्ति के निष्पादन एवं बाल श्रमिकों को कार्य से मुक्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सारण प्रमंडल के उप श्रम अधीक्षक का पद विगत तीन वर्षों से रिक्त है. इसका प्रभार पटना प्रमंडल के श्रम अधीक्षक को दिया गया है. परंतु दो-दो जगह के प्रभार के अलावा अन्य स्थानों के भी दायित्व के कारण छपरा कार्यालय आकर दायित्व का निर्वहन करना मुश्किल होता है.
वहीं सहायक श्रमायुक्त (कृषि श्रमिक) का पद कई महीने से खाली है तो श्रम अधीक्षक दिलीप भारती के 31 अगस्त को अवकाश ग्रहण करने के बाद यह पद रिक्त पड़ा है. प्रमंडलीय मुख्यालय छपरा में प्रमंडल एवं जिला स्तर के चार पदाधिकारियों के बदले महज एक पदाधिकारी श्रम अधीक्षक के रूप में कार्य देख रहे है. इसके अलावे जिले के 20 प्रखंडों में महज 9 प्रखंडों में ही श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी तैनात है. 11 प्रखंडों में पद रिक्त है.
श्रम अधीक्षक बम शंकर राम के अनुसार छपरा सदर, एकमा, बनियापुर, गड़खा, दिघवारा, सोनपुर, इसुआपुर, मढ़ौरा नगरा में ही श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी तैनात है. ऐसी स्थिति में एक-एक पदाधिकारी को दो से तीन प्रखंडों का दायित्व दिया गया है. उन्होंने माना कि पदाधिकारियों की कमी के कारण एक से ज्यादा प्रखंडों के दायित्व दिये जाने का असर श्रमिकों के कल्याण एवं शोषण मुक्त कराने के कार्यों में परेशानी स्वाभाविक है.
उप श्रम आयुक्त, श्रम अधीक्षक, सहायक श्रमायुक्त व श्रम प्रवर्तन पदाधिकारियों के पद रिक्त होने से धावा दल का कार्य भी बाधित
जिला से लेकर प्रखंड स्तर तक पदाधिकारियों के 75 फीसदी पद रिक्त है. ऐसी स्थिति में एक-एक पदाधिकारी को दो से तीन प्रखंडों का प्रभार देकर कार्य कराया जा रहा है. परंतु, प्रमंडल एवं जिला स्तर के पदाधिकारियों के पद रिक्त होने के कारण निश्चित तौर पर श्रमिकों के कल्याण एवं शोषण मुक्त कराने के लिए सरकारी प्रयास को धरातल पर उतारने में परेशानी हो रही है. पदाधिकारियों की कमी के संबंध में सरकार को लिखा गया है.
बमशंकर राम, श्रम अधीक्षक, सारण
