भगवद् प्राप्ति का मुख्य साधन है भक्ति: स्वामी रंगनाथाचार्य

कलेर : प्रखंड क्षेत्र के सोहसा गांव में चल रहा चार्तुमास यज्ञ के दौरान स्वामी रंगनाथाचार्य जी महाराज ने कहा कि भगवद प्राप्ति का मुख्य साधन भक्ति है. प्रवचन के दौरान स्वामी जी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति भगवद शरणार्थी का अधिकारी है. हमारे धर्म ग्रंथों में भगवद प्राप्ति के साधनों का वर्णन है जिसमें […]

कलेर : प्रखंड क्षेत्र के सोहसा गांव में चल रहा चार्तुमास यज्ञ के दौरान स्वामी रंगनाथाचार्य जी महाराज ने कहा कि भगवद प्राप्ति का मुख्य साधन भक्ति है. प्रवचन के दौरान स्वामी जी ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति भगवद शरणार्थी का अधिकारी है. हमारे धर्म ग्रंथों में भगवद प्राप्ति के साधनों का वर्णन है जिसमें मुख्यत: कर्मयोग, ज्ञानयोग, भक्ति योग का वर्णन आता है.

हमारे वैष्णव आचार्यों ने भक्ति और प्रपति को ही भगवान प्राप्ति का मुख्य साधन माना है. भक्ति प्रेम प्रधान है. उन्होंने कहा कि नारद जी ने भक्ति स्वरूप का प्रतिवादन करते हुए कहा है कि जिस प्रकार व्यक्ति का लगाव संसार के लोगों से है उसी प्रकार का स्नेह यदि भगवान से हो जाये तो उसी का नाम भक्ति है. भगवत कथा वार्ता का श्रवण, नामगुण का कीर्तन, स्मरण, वंदन, अपने को भगवान का दास समझना, पूजा -अर्चना करना, भगवान के चरणों में समर्पित कर देना, भक्ति की विद्याएं हैं. इसमें से एक भी किसी के पास हो तो वह भगवत कृपा का अधिकारी माना जाता है.

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