आठ माह से गायब पुत्र के लिए पथरा रहीं मां की आंखें

पानापुरए : प्रखंड के सतजोड़ा लखनपुर मार्ग पर स्थित मोथहा गांव मुख्य सड़क से सटे उत्तर रामनाथ प्रसाद का खपरैल मकान. दरवाजे पर शांति रामनाथ प्रसाद की पुत्रवधू गीता देवी की आंखें शून्य में निहारती. शायद इस उम्मीद में कि कही से कोई समाचार मिले. गत आठ माह का समय अपने खोये पुत्र की याद […]

पानापुरए : प्रखंड के सतजोड़ा लखनपुर मार्ग पर स्थित मोथहा गांव मुख्य सड़क से सटे उत्तर रामनाथ प्रसाद का खपरैल मकान. दरवाजे पर शांति रामनाथ प्रसाद की पुत्रवधू गीता देवी की आंखें शून्य में निहारती. शायद इस उम्मीद में कि कही से कोई समाचार मिले. गत आठ माह का समय अपने खोये पुत्र की याद में किस प्रकार बिताया होगा, शायद बता पाना मुश्किल है. गुमशुदा भास्कर के बारे में पूछने पर उसके आंसुओं का बांध टूट जाता है. भास्कर के दादा रामनाथ प्रसाद कहते हैं कि शायद ही कोई दिन होगा, जिस दिन भास्कर की याद न आती हो. खाने के हर निवाले के साथ वह दो आंसू जरूर बहाती है.

कौन है भास्कर : प्रखंड के मोथहा गांव निवासी राकेश प्रसाद का साढ़े तीन वर्षीय पुत्र था भास्कर. गत वर्ष 17 नवंबर की सुबह गांव के कुछ युवक छठ पूजा के लिए बगल स्थित तालाब की सफाई के लिए गये थे. उन्हीं के साथ भास्कर भी चला गया और फिर रहस्यमय ढंग से गायब हो गया. परिजनों द्वारा काफी खोजबीन की गयी, लेकिन कहीं भी उसका पता नहीं चला. अगले दिन भास्कर के दादा थाने पहुंचे एवं अपने पोते के अपहरण की प्राथमिकी दर्ज करायी.
विशेष टीम भी नहीं खोज पायी
पुलिस की कार्यशैली से नाराज ग्रामीणों ने स्थानीय थाने का घेराव किया था. तब तत्कालीन एसपी सत्यवीर सिंह भी मोथहा पहुंचे थे एवं भास्कर की सकुशल बरामदगी के लिए हरसंभव प्रयास का आश्वासन दिया था. इसके लिए उन्होंने एक विशेष टीम का गठन कर भास्कर की बरामदगी का निर्देश दिया था.
विशेष टीम गठित होने के बाद परिजनों को उम्मीद जगी थी कि शायद पुलिस भास्कर को सकुशल बरामद कर सके, लेकिन टीम ने जगह -जगह भास्कर की तसवीर लगाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री समझ ली. आठ माह बीत जाने के बाद भास्कर के परिजन अब नाउम्मीद हो चुके हैं. लेकिन मां गीता देवी अब भी उम्मीद लगाये हैं. उन्हें लगता है कि उनका पुत्र एक दिन जरूर आयेगा.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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