सरपट दौड़ेंगे वाहन, राह आसान

सुखद. शहर का पहला आरओबी का निर्माण कार्य अंतिम दौर में, 750 मीटर है लंबा चार-चार रेलवे ढाला के बंद रहने के कारण जाम से प्रतिदिन ढाला पर घंटों फंसे रहने की विवशता से शहरवासियों या ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को छपरा शहर में प्रवेश करने के लिए इस रेल ओवरब्रिज के जुलाई में खुल […]

सुखद. शहर का पहला आरओबी का निर्माण कार्य अंतिम दौर में, 750 मीटर है लंबा

चार-चार रेलवे ढाला के बंद रहने के कारण जाम से प्रतिदिन ढाला पर घंटों फंसे रहने की विवशता से शहरवासियों या ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को छपरा शहर में प्रवेश करने के लिए इस रेल ओवरब्रिज के जुलाई में खुल जाने से काफी राहत मिलेगी. निश्चित तौर पर छपरा शहर का पहला आरओबी जिलावसियों को सुखद अनुभूति करायेगा. इस कार्य को अंतिम रूप देने के लिए लाइटिंग के अलावा रंग-रोगन का कार्य भी अंतिम दौर में है.
छपरा (सदर) : भौगोलिक रूप से जिले के दक्षिण में स्थित छपरा शहर के साढ़ा ढाला पर रेल ओवरब्रिज निर्माण के बाद शहरवासियों के साथ-साथ दर्जन भर प्रखंड के लोगों के लिए यह पुल लाइफ लाइन का काम करेगी. जुलाई माह में हर हाल में यह पुल आमजनों के लिए चालू कर देने से छपरा शहर के साढ़ा ढाला, सारण एकेडमी, जगदम कॉलेज तथा गड़खा ढाला के पास रेलवे गेट के बंद रहने से जाम की समस्या से होनेवाली परेशानियों से प्रतिदिन लाखों लोगों को मुक्ति मिलेगी.
हालांकि इस पुल को 30 जून को ही पूरा करने का समय निर्धारित है, परंतु निर्माण कार्य के दौरान भी कंपनी के पदाधिकारियों व कर्मियों के मना करने के बावजूद दोपहिया वाहनों को मनमाने ढंग से पुल से पार कराना सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है.
26 करोड़ से बन रहे आरओबी का काम अंतिम दौर में : छपरा शहर के साढ़ा ढाला पर आरओबी का निर्माण करनेवाली इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड व उसकी सहायक हरि कंस्ट्रक्शन एंड एसोसिएट्स के द्वारा जुलाई, 2013 में कार्य प्रारंभ किया गया था, तब से सैकड़ों मजदूरों द्वारा दिन-रात निर्माण कार्य तकनीकी पदाधिकारियों की देख-रेख में चल रहा है. 750 मीटर लंबे इस आरओबी के निर्माण के लिए रेलवे लाइन के दोनों तरफ कुल 17 खंभे बनाये गये हैं.
वहीं, पुल के ऊपर सड़क की ढलाई व पिचिंग का काम अंतिम दौर में होने की बात प्रोजेक्ट मैनेजर राजीव कुमार सिंह बताते हैं. श्री सिंह के अनुसार, सभी मुख्य कार्य संपन्न हो चुके हैं. पुल के ऊपर क्रॉस बैरियर तथा एक्सपेंशन ज्वाइंट का काम चल रहा है. परंतु, मनमाने ढंग से लोगों द्वारा कार्य के दौरान दोपहिया या चारपहिया वाहन पुल पर चढ़ा देने से एक तो तकनीकी कार्य में बाधा आ रही है, दूसरे अप्रिय वारदात की भी संभावनाएं बनी रहती हैं.
पुल से उत्तर व दक्षिण उतरने के लिए बन रहीं चार सीढ़ियां : इस आरओबी के बीच में से रेलवे लाइन से सटे उत्तर तथा दक्षिण में, पूरब तथा पश्चिम विभिन्न मुहल्लों में पैदल जानेवाले या पुल पर चढ़नेवाले राहगीरों के लिए लोहे की सीढ़ियां बनायी जा रही हैं. इसके अलावा साढ़ा ढाला से उत्तर की ओर तथा साढ़ा ढाला से पश्चिम की ओर इस पुल की ढलान के दोनों तरफ भी पीसीसी की गयी है, जिससे वाहनचालकों को पुल से उतरने के बाद या अन्य मुहल्लों में नीचे से जाने में कोई परेशानी न हो.
अतिक्रमण के कारण सड़कों के निर्माण में बाधा : इस आरओबी के उत्तर की ओर जानेवाले ढाला के पूरब की ओर निजी व्यक्तियों द्वारा अतिक्रमण कर दुकान बना लिये जाने, दक्षिण की ओर कचहरी स्टेशन के निकट आसपास के लोगों द्वारा मनमाने ढंग से विगत दो-तीन वर्षों से देवताओं की एक दो मूर्तियां पेड़ के चबूतरे पर रख दिये जाने से कंपनी के पदाधिकारी सड़क निर्माण कार्य पूरा करने में अपने को असमर्थ पा रहे हैं.
रेलवे तथा स्थानीय प्रशासन की जमीन में अतिक्रमण करनेवाले ऐसे लोगों से मुक्ति की दिशा में जिला प्रशासन व रेल प्रशासन भी उदासीन बना हुआ है. आखिर कंस्ट्रक्शन कंपनी के पदाधिकारी करें भी तो क्या करें.
दर्जन भर प्रखंडों के लोगों के लिए यह पुल होगा लाइफ लाइन
जुलाई में हर हाल में शहरवासियों के लिए खुल जायेगा साढ़ा ढाला रेल ओवरब्रिज
पुल की दोनों तरफ बगल से चार सड़कें, बीच में पैदल यात्रियों के लिए सुविधाजनक चार सीढ़ियांपुल एक नजर में
कुल लागत : 26 करोड़
पुल की लंबाई : 750 मीटर
पुल की चौड़ाई : 7.5 मीटर
पुल में खंभों की संख्या : 17
रेलवे लाइन से दक्षिण तथा उत्तर से विभिन्न मुहल्लों के लोगों की सुविधा के लिए पुल के दोनों तरफ पीसीसी सड़क
साढ़ा ढाला के दोनों तरफ पैदल पुल पर चढ़ने या उतरनेवालों के लिए लोहे की चार सीढ़ियां

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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