उद्धारक की बाट जोह रहा है मवेशी अस्पताल

बनियापुर : विगत दो दशकों से प्रखंड मुख्यालय स्थित मवेशी अस्पताल उपेक्षा का शिकार है. भवन, पेयजल, शौचालय, लाइट, पशुओं के लिए दवा सहित तमाम मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव होने की वजह से पशुपालकों के लिए अस्पताल नकारा साबित हो रहा है. भ्रमणशील पशु चिकित्सा पदाधिकारी प्रभाकर प्रवीण ने बताया कि जर्जर भवन को […]

बनियापुर : विगत दो दशकों से प्रखंड मुख्यालय स्थित मवेशी अस्पताल उपेक्षा का शिकार है. भवन, पेयजल, शौचालय, लाइट, पशुओं के लिए दवा सहित तमाम मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव होने की वजह से पशुपालकों के लिए अस्पताल नकारा साबित हो रहा है. भ्रमणशील पशु चिकित्सा

पदाधिकारी प्रभाकर प्रवीण ने बताया कि जर्जर भवन को लेकर कार्यरत
कर्मी अंदर जाने से कतराते हैं. उनमें हर समय अप्रिय घटना होने की आशंका बनी रहती है. वस्तुस्थिति से जिला पशुपालन पदाधिकारी को कई बार अवगत कराये जाने के बाद भी अब तक कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया. भवन का बरामदा एक दशक पूर्व ही गिर चुका है.
इधर, पशुपालकों को अस्पताल के माध्यम से आवश्यक सेवाएं प्राप्त नहीं होने से निजी तौर पर अपने पशुओं का इलाज कराना पड़ता है, जहां झोला छाप पशु चिकित्सकों द्वारा मनमाने तरीके से रुपये की उगाही की जाती है.इससे पशुपालकों में विभागीय उपेक्षा को लेकर रोष व्याप्त है. पशुपालकों का कहना है कि गत एक वर्ष से टीकाकरण का कार्य भी बंद है. ऐसे में पशुओं का टीकाकरण नहीं होने से कई जानलेवा बीमारियों का संक्रमण होने का खतरा बढ़ गया है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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