पिता के सामने डूबे ‘लाल’
देखते ही देखते गुम हो गयी किलकारी
मुहल्लेवासी भी घटना से है सदमें में
छपरा (कोर्ट) : इसे भगवान की लीला कहें या कुछ और कि एक ही पिता के तीन पुत्र पिता की आंखों के सामने एक-एक कर नदी के आगोश में समा गये. पिता एवं परिजन उन्हें डूबता देख अपना छाती पीट रहे थे़ लेकिन, काल ने तीनों को अपने गाल में समा लिया. रिविलगंज के सेमरिया घाट पर शनिवार की दोपहर जो हृदय विदारक घटना घटी उसे सुन कर लोग स्तब्ध हो गये. जिनके समक्ष वह घटना घटी उनका हाल व हालात पूछना ही बेमानी है.
चाचा की अंत्येष्टि में शामिल होने अपने परिजनों के साथ गये थे तीनों युवक : उनके परिजन क्या जानते थे कि एक ही नहीं बल्कि तीन और युवा की भी अंत्येष्टि करनी पड़ेगी. जिन लोगों ने इस हृदय विदारक घटना को अपनी आंखों से देखा है उनकी आत्मा कांप उठी है वे कुछ भी बताने से सक्षम नहीं है. मासूम गंज निवासी रामनाथ राय व शोभा देवी के सात बेटे थे जिनकी एक ही दिन में संख्या घट कर चार रह गयी.
इसे प्रकृति का प्रकोप कहें या कुदरत का कहर कि पिता के आंखों के सामने उसके तीन लाल एक-एक कर मौत के मुंह में समा गये और वे कुछ भी न कर सके एक नहीं बल्कि अपने कलेजे के तीन टुकड़े की दर्दनाक मौत की खबर सुन माता शोभा देवी पर तो बज्रपात ही हो गया. ऐसी खबर सुनने के पहले उनकी मौत क्यों न हो गयी इसको लेकर वे भगवान को कोश रही थी. उनकी हृदय विदारक रूदन व क्रंदन से पत्थर दिल भी फफक पड़ता था.
उन्हें समझा पाना मामुली इंसान के बस की बात नहीं थी. इंटर पास सोनू और धनु तथा आठवें का छात्र विशाल की बहन रानी कुमारी का भी रो-रो कर बुरा हाल था. सोनू से छोटी व इन दोनों से बड़ी रानी की चीख-पुकार से पूरा माहौल गमगीन हो गया है. रामनाथ राय और उनके परिवार पर जो दुख के पहाड़ टूटे हैं उसकी कल्पना कर लोगों की रूह कांप जाती है
और उनके मुंह से बरबस निकल पड़ता है कि भगवान ऐसा दिन तो किसी दुश्मन को भी न दिखाये. एक घर के तीन युवा की मौत उस पर उनका शव का भी नहीं मिलना उस परिवार पर तो आघात पर आघात है. माता-पिता, भाई-बहन और परिजन अपने घर के लालों का शव भी नहीं देख पा रहे हैं.
