गरमी में बढ़ी आरो वाटर की चार गुनी मांग

छपरा : शहर में पीने के पानी में कई तरह के दोष होने के कारण पानी से संबंधित बिमारियों के मामले बढ़ गये हैं. गरमी की वजह से अधिकतर पानी के सेवन लोगों के लिए बीमारी का कारण बन रहा है. पानी चाहे सप्लाइ का हो या बोरिंग का उसमें विषाक्त मेटेरियल की मात्रा रहने […]

छपरा : शहर में पीने के पानी में कई तरह के दोष होने के कारण पानी से संबंधित बिमारियों के मामले बढ़ गये हैं. गरमी की वजह से अधिकतर पानी के सेवन लोगों के लिए बीमारी का कारण बन रहा है. पानी चाहे सप्लाइ का हो या बोरिंग का उसमें विषाक्त मेटेरियल की मात्रा रहने की आशंका बनी रह रही है.

वाटर टेस्ट के लिए बनाये गये केंद्र के बंद रहने से शहरवासी को पानी की गुणवत्ता के बारे में जानकारी नहीं हो पाती. वैसे में लोग आर्सेनिक, आयरन व अन्य विषाक्त अबयओं की मात्रा मौजूद होती है. ऐसे में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग बोरिंग व सप्लाई के पानी का बेहतर विकल्प तलाश रहे है. कुछ लोग अपने घरों में आरो की मशीन लगवा रहे है तो कुछ मार्केट से आरो वाटर की बोतल खरीदने को विवश है. इससे शहर में तेजी से आरो वाटर प्लांट का नेटवर्क बढ़ा है. जार वाले पानी की सप्लाइ की मांग भी बढ़ गयी है.

अलग-अलग है टीडीएस का प्रतिशत : जानकारी के अनुसार सामान्य पानी में टीडीएस की मात्रा 40-45 प्रतिशत होनी चाहिए, लेकिन बोरिंग व सप्लाइ के पानी में टीडीएस 200 से ज्यादा है. अलग-अलग जगहों पर इसकी मात्रा भी अलग-अलग है.
बदबू व गंदगी की वजह से बढ़ी डिमांड : शहर के पास स्थित एक आरो प्लांट के संचालक का कहना है कि सप्लाइ व बोरिंग के पानी में बदबू व गंदगी की वजह से लोग आरो का पानी डिमांड कर रहे हैं.
इसके साथ ही उन्हें गर्मी में ठंडा पानी भी उपलब्ध हो जाता है. इस वजह से आरो वाटर की मांग बढ़ रही है. वाटर बॉटलिंग के बारे में उनका कहना है कि पानी को प्यूरिफाइ कर प्लांट में पीने योग्य बनाया जाता है. इसके बाद उसे 15 व 20 लीटर के जार में मार्केट में भेजा जाता है. आरो इकाई के कई मालिकों ने बताया कि इन दिनों हर रोज लगभग पौने दो लाख लीटर पानी की खपत हो रही है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >