बनियापुर : अगहन बरसे हून, पूस बरसे दून, माघ बरसे सवाई, फागुन बरसे मूल गंवाई. महाकवि घाघ द्वारा रचित दोहे मौसम के बदले मिजाज को देख बिल्कुल फिट बैठ रहे हैं. इन दोहों का सीधा अर्थ है कि अगहन में बारिश होने से फसल अच्छी होती है और पूस में वर्षा हो तो दूनी फसल होगी.
वहीं माघ में वर्षा होने पर सवाई पैदावार होती है. परंतु वर्षा अगर फागुन महीने में होती है, तो बीज मिलना भी मुश्किल हो जाता है. सोमवार की सुबह से ही तापमान में आयी गिरावट एवं गरज के साथ बूंदा-बूंदी होने से किसानों की चिंता बढ़ गयी है. किसानों को इस बात का डर सताने लगा है कि कहीं गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी गेहूं की फसल बरबाद न हो जाये. हालांकि मौसम विभाग के अनुसार एक-दो दिनों तक इसी तरह बने रहने की संभावना जतायी जा रही है.
अनुभवी किसानों का कहना है कि हवा और पानी एक साथ होने से जहां एक ओर गेहूं के पौधे गिरने से उत्पादन पर बुरा असर पड़ेगा, वहीं सरसों की तैयार फसल को नुकसान होगा. उधर, आम में लगे मंजर पर भी वर्षा एवं हवा से प्रभावित होने की आशंका जतायी जा रही है. कई किसानों का कहना है कि अक्सर इस मौसम में ओला पड़ने की आशंका बनी रहती है. अगल ऐसा हुआ, तो भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. मालूम हो कि गत वर्ष मार्च-अप्रैल में बारिश एवं ओला पड़ने से किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था.
ठंड में हुआ इजाफा : मौसम के यू टर्न लेने से तापमान में आयी गिरावट ने लोगों को एक बार फिर ऊनी कपड़े पहनने को मजबूर कर दिया है. मार्च के प्रथम सप्ताह से तापमान में वृद्धि के कारण लोगों ने ऊनी वस्त्र बक्से में रख दिये थे, जिसे पुनः निकालना पड़ा.
