हम नहीं सुधरेंगे, कर लो चाहे जितने जतन

हम नहीं सुधरेंगे, कर लो चाहे जितने जतनदिघवारा बस स्टैंड के पास पटना से छपरा जा रहीं इन दो बसों का नजारा देख कर यह निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि कुछ लोगों को अपनी जान की चिंता नहीं है. उन्हें यह नहीं महसूस होता है कि घर में कोई उनका इंतजार कर […]

हम नहीं सुधरेंगे, कर लो चाहे जितने जतनदिघवारा बस स्टैंड के पास पटना से छपरा जा रहीं इन दो बसों का नजारा देख कर यह निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि कुछ लोगों को अपनी जान की चिंता नहीं है. उन्हें यह नहीं महसूस होता है कि घर में कोई उनका इंतजार कर रहा है. अगर उन्हें वाकई चिंता होती, तो चंद रुपये बचाने के एवज में बस की छत पर चढ़ कर अपनी जान से खिलवाड़ नहीं करते. कभी कोई ओवरहेड बिजली का तार उन्हें अपनी चपेट में ले सकता है. इससे कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है. वहीं, दूसरी ओर यह नजारा ओवरलोडिंग रोकने के प्रति प्रशासनिक दावे की पोल भी खोल रहा है. आखिर ऐसी ओवरलोडेड बसों के चालकों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है.

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