छपरा (सदर) : एक समय में कुछ बाल आवासियों की कारगुजारियों को लेकर समय-समय पर सुर्खियों में रहनेवाले संप्रेषण गृह सह बाल सुधार गृह का माहौल बदला है. नये पदाधिकारियों की पहल व अपने दायित्वों के निर्वहण के प्रति सजगता के कारण बाल आवासी अब अपना भविष्य सुधारने के लिए एक-दूसरे के भविष्य को सुधारने के लिए प्रयत्नशील हैं.
इससे विभिन्न मुकदमों में पुलिस द्वारा पकड़ कर लाये गये अपने कनीय साथियों को बेहतर शिक्षा देने एवं अनपढ़ साथियों को साक्षर बनाने का हर संभव प्रयास करते दिख रहे हैं. यही नहीं, बाल संरक्षा से जुड़े पदाधिकारियों व अधीक्षक की सकारात्मक पहल के बाद कॉलेज स्तर के बाल आवासी भी उपलब्ध सुवधाओं के बीच अपने व साथियों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत हैं.
दर्जन भर बाल आवासियों को बनाया साक्षर : संप्रेषण गृह सह बाल सुधार गृह में कुल 63 बाल आवासी विभिन्न मुकदमों में पकड़ कर लाये गये हैं. वे छपरा स्थित रेड क्राॅस सोसायटी के अनुपयुक्त कमरे में रहने के बावजूद खुद व अपने साथियों के सुधार के प्रति सजग दिख रहे हैं.
इनमें तीन स्नातक प्रथम वर्ष, पांच इंटरमीडिएट तथा 11 मैट्रिक परीक्षा में शामिल होने के लिए पंजीयन करा कर खुद की तैयारी कर रहे हैं. हालांकि जिला प्रशासन द्वारा समाज कल्याण विभाग के इस गृह में दो प्रारंभिक स्तर के शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति भी की गयी है. परंतु, स्नातक प्रथम वर्ष विज्ञान में गणित, फिजिक्स तथा रसायन से प्रतिष्ठा की पढ़ाई विभिन्न कॉलेजों में करनेवाले सारण, सीवान, गोपालगंज अपने कनीय मैट्रिक व इंटर में पढ़नेवाले साथियों को उन्हें विषय की तैयारी कराने का हर संभव प्रयास करते हैं.
वहीं, रिमांड होम के अधीक्षक, जो खुद पॉलीटेक्निक की पढ़ाई करने के साथ-साथ स्नातक हैं, उनके द्वारा भी बच्चों को खास कर साइंस को बेहतर ढंग से बताने का प्रयास किया जाता है. वहीं, मैट्रिक व इंटर में पढ़नेवाले बाल आवासियों ने भी अपने साथ रहनेवाले दर्जन भर बाल आवासियों को बाल सुधार गृह में आने के बाद साक्षर बना दिया है. अब वे अपना नाम-पता लिखने के साथ-साथ 20 तक का पहाड़ा भी याद कर लिये हैं.
इनको पढ़ाने का कार्य 10 से 12 दिन में तथा अपराह्न दो बजे से पांच बजे तक अपने वरीय साथियों द्वारा किया जाता है. वहीं, बाल संरक्षण इकाई के सहायक निदेशक भास्कर प्रियदर्शी, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी सुधीर कुमार आदि के द्वारा भी इन्हें नैतिक शिक्षा से संबंधित पढ़ाई भी समय-समय पर करायी जाती है. वहीं, इन पदाधिकारियों ने समाज के बुद्धिजीवियों से भी नैतिक शिक्षा की कक्षाएं लेने का आग्रह किया है, जिससे बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाया जा सके. एक बाल आवासी ने बताया कि हमारे माता-पिता व भाई सभी अनपढ़ हैं. यहां आने के बाद अपने से बड़े व पढ़े-लिखे साथियों व भाइयों के सहयोग से मैं साक्षर बन गया.
क्या कहते हैं अधिकारी
सतत प्रयास कर संप्रेषण गृह के माहौल को बदल कर बच्चों को बेहतर माहौल देने का प्रयास किया जा रहा है. अब बच्चे आपस में सौहार्दपूर्ण वातावरण में रहने के साथ-साथ एक दूसरे को पठन-पाठन में भरपूर सहयोग कर सकारात्मक सोच दिखा रहे हैं, जो निश्चित तौर पर संप्रेषण गृह के लिए सुखद है.
रोहित कुमार
अधीक्षक, संप्रेषण गृह सह बाल सुधार गृह, छपरा
