विडंबना : जेइ के 20 में 19 पद रिक्त, कई अन्य पद भी खाली
छपरा (सदर) : सरकार द्वारा लघु सिंचाई विभाग के माध्यम से खराब पड़े 300 से ज्यादा नलकूपों की मरम्मत पर किसानों के खेत में सिंचाई के लिए पानी पहुंचाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है.
इसके लिए सरकार ने प्रयाप्त राशि भी उपलब्ध करायी है. परंतु, इन नलकूपों की मरम्मत के दौरान निरीक्षण या अन्य कर्मियों को स्थल पर जाकर जांच करने के लिए विभाग के 95 फीसदी कनीय अभियंता व सहायक अभियंता के पद रिक्त हैं. ऐसी स्थिति में इन मरम्मत कार्य का बेहतर कार्यान्वयन मार्च तक करा कर किसानों को सस्ती दर पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने की लक्ष्य प्राप्ति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है.
महज नौ प्रखंडों ने ही शताब्दी नलकूप योजना के चयनित किसानों की दी सूची : सरकार
द्वारा शताब्दी नलकूप योजना के तहत जिले के एक हजार किसानों कोबोरिंग लगाने व पंपिंग सेट खरीदने के लिए चयनित कर उनकी सूची के आधार पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था. पांच माह पूर्व जिले के सभी प्रखंडों के बीडीओ को किसानों को आवेदन की सूची की जांच कर उन्हें योजना का लाभ दिलाने का प्रयास किया गया था.
परंतु, महज नौ प्रखंडों के यथा सोनपुर, परसा, दरियापुर, दिघवारा, छपरा सदर, जलालपुर, गड़खा, लहलादपुर, मकेर के बीडीओ ने ही 363 आवेदन की स्वीकृति की सूची लघु सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता को भेजी. शेष 11 प्रखंडों के बीडीओ ने विभागीय कार्यपालक अभियंता के बार-बार पत्राचार केबावजूद पांच माह में चयनित किसानों की सूची नहीं भेजी, जिससे योजना का कार्यान्वयन खटाई में पड़ गया है.
300 से ज्यादा नलकूप पड़े हैं खराब
सारण जिले में नाबार्ड फेज 11 के तहत लगाये गये 65 नलकूपों में 17, नाबार्ड फेज 8 के 36 नलकूपों में से नौ के तथा पूर्व के 207 नलकूपों में से महज 47 के चालू रहने का दावा किया जा रहा है. हालांकि, सरकार द्वारा मार्च तक नाबार्ड फेज 8 तथा 11 के सभी बंद पड़े 75 नलकूपों की मरम्मत व अन्य कार्यों के लिए दो करोड़ 85 लाख रुपये आवंटित किये हैं, जिससे बंद पड़े इन नलकूपों को मार्च तक चालू कर किसानों के खेत में पानी पहुंचाया जा सकता है.
वहीं, लघु सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता ने पूर्व के बंद पड़े 160 राजकीय नलकूपों में से भी जो तकनीकी खराबी, विद्युत दोष या अन्य कारणों से अनुपयोगी हो गये हैं, उनमें से 25 को मरम्मत करने के लिए एस्टिमेट भी राज्य मुख्यालय को भेजा है.
एक जेइ को 19 का प्रभार, तो एक एसडीओ को चार का प्रभारलघु सिंचाई विभाग में सभी प्रखंडों में नलकूप विभाग के कार्यों की प्रगति, वर्तमान स्थिति, नया नलकूप आवंटन करानेवाले किसानों से संपर्क कर पूरी स्थिति को जांचने व अन्य तकनीकी कार्यों के लिए 20 कनीय अभियंता का पद सृजित है. परंतु, महज एक कनीय अभियंता ही छपरा में पदस्थापित हैं.
ऐसी स्थिति में शेष 19 का प्रभार एक कनीय अभिंयता को दिया गया है. इसी प्रकार पांच सहायक अभियंताओं के बदले महज एक सहायक अभियंता जिले में है. ऐसी स्थिति में शेष चार का प्रभार भी एक ही सहायक अभिंयता को दिया गया है. ऐसी स्थिति में तकनीकी एवं पर्यवेक्षीय कार्यों के बेहतर संचालन का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है.
सरकार के द्वारा नलकूपों की मरम्मत कर किसानों के खेतों में सिंचाई की सुविधा बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है. परंतु, मरम्मत व पर्यवेक्षण का कार्य निश्चित तौर पर 95 फीसदी कनीय अभियंताओं तथा 80 फीसदी सहायक अभियंताओं के पद रिक्त होने के कारण बाधित हो रहा है.
मार्च तक खराब नलकूपों की मरम्मत के लिए टेंडर कर दिया गया है. वहीं, शेष 11 बीडीओ को यथाशीघ्र शताब्दी नलकूप योजना के चयनित किसानों की सूची भेजने के लिए स्मारपत्र दिया गया है. योगेंद्र प्रसाद यादव कार्यपालक अभियंता, लघु सिंचाई विभाग, सारण
