निजी रेल टिकट आरक्षण केंद्रों पर हो रही अवैध वसूली फर्जीवाड़ा. चार दर्जन निजी काउंटरों में अधिकतर निर्धारित दर से आठ से 10 गुना ज्यादा रुपये वसूले जा रहे हैं यात्रियों सेआइआरसीटीसी के मानदंडों की उड़ रहीं धज्जियां रेल यात्रियों का हो रहा शोषण प्रति टिकट स्लीपर क्लास के लिए 10 रुपये तथा वातानुकूलित के लिए 20 रुपये निर्धारित है कमीशन सीआरएम ने कहा, शिकायत पर मिलने पर होगी कार्रवाई संवाददाता, छपरा (सदर)रेलवे ने यात्रियों को बिना परेशानी के बहुत कम अतिरिक्त लागत पर रेल यात्रा की सुविधा देने के लिए जिले में कम-से-कम चार दर्जन निजी रेल टिकट आरक्षण केंद्र (आरएसपी) खोले गये हैं. आइआरसीटीसी के तहत रजिस्टर्ड इन आरएसपी को पूरी तरह प्रावधानों के तहत काम करने व यात्रियों से प्रति टिकट 10 रुपये कमीशन तथा वातानुकूलित टिकट के लिए 20 रुपये प्रति टिकट यात्रियों से लेना है. परंतु, इन अधिकृत टिकट काउंटर के अधिकतर संचालकों द्वारा निर्धारित कमीशन से आठ से 10 गुना तक राशि अवैध रूप से वसूली की जाती है. आखिर यात्री करें, तो क्या करें. उन्हें तो अपने गंतव्य स्थान पर सुरक्षित जाने की मजबूरी है. आइआरसीटीसी ने अधिकृत टिकट काउंटरों के लिए कई आवश्यक निर्देश दिये हैं: एजेंसी कमीशन – प्रति पैसेंजर के बदले प्रति टिकट लेना हैयात्री से पैसे लेने की रसीद देनी हैटिकट बुकिंग करने तथा पैसे लेने के संबंध में रजिस्टर संधारित करना हैयात्रियों से आरक्षण फाॅर्म भरवाने का प्रावधान हैकाउंटर के लिए निर्धारित कोटे के तहत ही तत्काल टिकट बुक करनी है निजी आइडी से किसी भी यात्री का टिकट बनाना गैरकानूनी हैनिर्धारित कमीशन से ज्यादा चार्ज नहीं लेना हैटिकट वापसी की राशि यात्री के खाते में अधिकृत एजेंट को रेलवे से राशि मिलने के तीन से पांच दिन के अंदर भेज देनी है मानदंडों को ताख पर रख रहे हैं आरक्षण के अधिकतर अधिकृत केंद्रजिले के 90 फीसदी अधिकृत आरक्षण केंद्र आइआरसीटीसी के मानदंडों को नजरअंदाज कर अवैध कमाई में मशगूल है. इनके द्वारा अवैध कमाई के लिए एक तो प्रति टिकट के बदले यात्री की संख्या के आधार पर कमीशन की वसूली की जाती है. वह भी आठ से 10 गुना या उससे भी ज्यादा. निजी कमाई के लिए विभिन्न चार स्थानों के यात्रियों का तत्काल आरक्षण टिकट एक ही टिकट पर बनवा देते हैं तथा चारों से अपना कमीशन अलग-अलग लेने के साथ-साथ एक यात्री को मूल टिकट तथा अन्य को उसकी फोटो कॉपी देे देते हैं. रेलवे द्वारा निर्धारित कोटे के बावजूद तत्काल टिकट आरक्षण में अवैध कमाई के लिए ये निजी आइडी का भी इस्तेमाल करते हैं. वहीं, व्यक्तिगत आइडी पर टिकट देना गैरकानूनी है. अधिकतर अधिकृत काउंटर यात्रियों को पैसा लेने की न रसीद देते हैं न आरक्षण फाॅर्म भरवाते है और न रजिस्टर मेंटेन करते हैं. केस स्टडी-01साहेबगंज स्थित एक आरएसपी काउंटर. प्रभात खबर की टीम के पहुंचने के बाद छपरा से दिल्ली के लिए तत्कालीन टिकट के लिए 900 रुपये प्रति यात्री का डिमांड अधिकृत आरक्षण काउंटर पर बैठे हुए कर्मी द्वारा किया जाता है. यह कहे जाने पर कि यह तो बहुत ज्यादा है. एजेंट का जवाब होता है कि 5-10 रुपये कम कर सकते हैं. आप अपना पहचान पत्र व पता लिखाएं तथा पैसे जमा कर दें. तत्काल टिकट पर दिल्ली का किराया 605 से 610 तक है. केस स्टडी-02इसी प्रकार स्लीपर क्लास के लिए दो यात्रियों का सद्भावना का आरक्षण टिकट कराने के लिए 1100 रुपये की मांग की जाती है. दिल्ली का किराया अधिकतम 485 तक है. यह वसूली ऐसी स्थिति में होती है, जबकि आइआरसीटीसी ने इनका प्रति टिकट कमीशन निर्धारित कर दिया है. रेलवे ने अवैध वसूली व अन्य अनियमितताओं पर किया है कार्रवाई का प्रावधानआइआरसीटीसी के द्वारा इनके विरुद्ध कार्रवाई का भी प्रावधान है. परंतु, आइआरसीटीसी का स्थानीय स्तर पर कोई पदाधिकारी नहीं होने के कारण मनमाने ढंग से रेलवे की उम्मीदों के प्रतिकूल यात्रियों का दोहन किया जाता है. यात्रियों का टिकट कराने एवं कैंसिलेशन की स्थिति में किसी भी प्रकार की मनमानी पर कार्रवाई का प्रावधान है. परंतु, यात्री स्थानीय स्तर पर पदाधिकारी नहीं होने के कारण तथा अपनी यात्रा को लेकर आरक्षण से परेशानी के कारण इनके खिलाफ कुछ कर नहीं पाते. यदि इनके खिलाफ शिकायत मिलती है, तो इनके विरुद्ध जवाब तलब कर जुर्माना लगाने व काउंटर को निलंबित या बंद करने का भी प्रावधान है. क्या कहते हैं अधिकारीकिसी भी आरएसपी के द्वारा अनियमिता की शिकायत यात्रियों के द्वारा की जाती है, तो उनके विरुद्ध जवाब तलब कर जुर्माना एवं काउंटर बंद करने की कार्रवाई की जायेगी. यात्री प्रमाण के साथ हमारे मेल पर या डाक के माध्यम से भेज सकते हैं. आरक्षण टिकट के अधिकृत एजेंटों की किसी भी प्रकार की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जायेगी. अश्विनी कुमारसीआरएम, (आइआरसीटीसी), लखनऊ, पूर्वोत्तर रेलवे
निजी रेल टिकट आरक्षण केंद्रों पर हो रही अवैध वसूली
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