आत्मा व परमात्मा के मिलन का साधन है श्रीमद्भागवत नोट: फोटो नंबर 17 सी.एच.पी 9,10 है कैप्सन होगा- प्रवचन देते महाराज जी व उपस्थित श्रद्धालु छपरा (कोर्ट). मानव को सदा सत्य आचरण करना चाहिए. जिस आचरण से हमारा मन, बुद्धि, वचन व कार्य सब पवित्र हो, साथ ही जब तक सत्य का विजय नहीं होता, तब तक व्रत के रूप में उसे धारण किये रहना चाहिए. द्रौपदी ने तब तक अपने केश पाश को खुले रखा, जब तक दुर्योधन समेत सभी कौरवों का संपूर्ण नाश नहीं हो गया. उक्त प्रवचन महर्षि दधीचि की तपस्थली उमानाथ मंदिर में चल रही कथा के छठे दिन परमहंस स्वामी गोपालाचार्य जी महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को कथा वाचन के दौरान कहा. उन्होंने कहा कि परमात्मा के प्रति हमारा समर्पण ऐसा होना चाहिए कि उन्हें विवश होकर हमारे पास आना पड़े. गोपियों का प्रेम और समर्पण ही था कि भगवान कृष्ण को उनके घर आकर माखन की चोरी तथा उन सबों के साथ रासलीला करना पड़ा. इस अवसर पर जयराम सिंह, अरुण, पुरोहित, ललन प्रताप सिंह, रंगनाथ तिवारी, श्यामसुंदर मिश्र, आदित्य गुप्ता, पुरुषोत्तमाचार्य, संजय कुमार पाठक आदि था.
आत्मा व परमात्मा के मिलन का साधन है श्रीमद्भागवत
आत्मा व परमात्मा के मिलन का साधन है श्रीमद्भागवत नोट: फोटो नंबर 17 सी.एच.पी 9,10 है कैप्सन होगा- प्रवचन देते महाराज जी व उपस्थित श्रद्धालु छपरा (कोर्ट). मानव को सदा सत्य आचरण करना चाहिए. जिस आचरण से हमारा मन, बुद्धि, वचन व कार्य सब पवित्र हो, साथ ही जब तक सत्य का विजय नहीं होता, […]
