स्वेटर बुनाई बना कुटिर उद्योग हाथों से बने ऊनी कपड़ों की मांग घटी मशीन से बने ऊनी कपड़ों को पसंद कर रहे हैं लोग नोट: दिघवारा से फोटो मेल से भेजा गया है. संवाददाता-दिघवारा एक जमाना था जब घरों की महिलाएं घर का काम निबटा कर जमा होती थीं और ऊन व कांटों के सहारे परिजनों का स्वेटर, मोफलर, मौजे आदि बनाती थीं़ ठंड की शुरुआत होने से पूर्व ही महिलाओं को स्वेटर समेत कई वेराइटी के ऊनी कपड़ों को बुनते देखा जाता था. मगर नये जमाने में लोगों का सोच बदला़ अब बहुत कम लोगों के शरीर पर ही हाथों से बनाये गये स्वेटर व अन्य ऊनी कपड़े नजर आते हैं. उनी कपड़ों की बुनाई में मशीनों का प्रयोग होने से हाथों की बुनाई वाले उनी कपड़ों का डिमांड घट गया है. अब आम लोग बुने गये स्वेटर व आम उनी कपड़ों को ज्यादा पसंद करने लगे है. मशीन से बने स्वेटर व अन्य कपड़ों की दो खासियतें होती हैं एक तो कपड़े की फीनिशिंग अच्छी होती है, वहीं दूसरा मशीन से बने उनी कपड़े आकर्षक लुक देते हैं. बेहतर कमाई के साथ दिया रोजगार भी नगर पंचायत दिघवारा में भी स्वेटर बुनाई कुटीर उद्योग का शक्ल ले रहा है. पश्चिमी रेलवे ढाले के बैंक ऑफ बड़ौंदा के पास राजेश्वर प्रसाद के मकान में स्वेटर बुनाई उद्योग शुरू है. शंकर कारलो उद्योग के नाम से शुरू इस कारखाने में लुधियाना की कुशल कारीगरों द्वारा ग्राहकों के डिमांड के अनुसार मशीन से प्रतिदिन सैकड़ों स्वेटरों को बुना जाता है. इस काम से जुड़ने से कई स्थानीय लोगों को रोजगार मिला है. वहीं प्राप्त आमदनी से कारीगरों की आर्थिक दशा बेहतर हो रही है. चार मशीनों के सहारे बुना जाता है स्वेटरलुधियाना में वर्ष 1994 से स्वेटर बुनाई का काम कर रहे औरंगाबाद के 42 वर्षीय कारीगर महेंश कुमार के नेतृत्व में आधा दर्जन कारीगर चार मशीनों के सहारे इस कारखाने में स्वेटर, मफलर, स्कॉट समेत कई उनी कपड़ों को बनाते हैं. कारखाना में सात गेज की एक, आठ गेज की दो व 10 गेज उन वाली दो मशीनें उपलब्ध है. इनके सहारे ग्राहकों के ऑडर के अनुसार ऊनी कपड़े बनाये जाते हैं. ऐसे बनता है स्वेटरसबसे पहले ऊन का गोला बनाया जाता है. मशीन से ऊन के गोले सेकपड़ा बनाकर उसपर आयरन किया जाता है. फिर उसकी कटाई, सिलाई व धुलाई करने के बाद तैयार स्वेटरों को आयरन कर पैक कर दिया जाता है. एक दिन में एक मजदूर एक मशीन से 20 से 25 स्वेटर बनाते हैं. स्वेटर ग्राहकों द्वारा दिये गये डिजाइनों के अनुसार भी बनाया जाता है. क्या कहते हैं कारखाना संचालकस्वेटर बनाने के काम को शुरू करने के लिए जिला उद्योग से लाइसेंस लेने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है. लोन भी फाइनांस कराया गया है एवं चार मशीनों के सहारे लुधियाना के कुशल कारीगरों से स्वेटर की बुनाई कर आस-पास के बाजारों में बेचा जाता है. लोग मशीनों से बनाये स्वेटरों को खूब पसंद कर रहे हैं. रंजन कुमार, संचालक, शंकर कॉरलो उद्योग दिघवारा, सारण
स्वेटर बुनाई बना कुटिर उद्योग
स्वेटर बुनाई बना कुटिर उद्योग हाथों से बने ऊनी कपड़ों की मांग घटी मशीन से बने ऊनी कपड़ों को पसंद कर रहे हैं लोग नोट: दिघवारा से फोटो मेल से भेजा गया है. संवाददाता-दिघवारा एक जमाना था जब घरों की महिलाएं घर का काम निबटा कर जमा होती थीं और ऊन व कांटों के सहारे […]
