छपरा (सदर) : प्रशासन के शांतिपूर्ण मूर्ति विसजर्न के मंसूबों को नाकाम करने की नींव तीन दिन पूर्व ही पड़ गयी थी, जब शुक्रवार को मूर्ति विसजर्न के दौरान दो गुटों के बीच तनाव तथा मारपीट की घटना हुई थी. हालांकि इस घटना को दबाने तथा शांतिपूर्ण विसजर्न संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन पग-पग पर नजर रखे हुए था.
परंतु, मूर्ति विसजर्न के दौरान कथित रूप से मूर्ति रोके जाने के विवाद ने प्रशासन के मंसूबों पर पानी फेर दिया. अंतत: डीएम तथा एसपी के सारे प्रयास के बावजूद सोमवार को पूरा शहर अशांत रहा.
हालांकि इस दौरान जान-माल की क्षति नहीं होने से प्रशासन में सुकून दिखा. प्रशासन को पूर्व में ही आशंका थी कि यदि विसजर्न के दौरान सख्ती नहीं बरती गयी, तो विसजर्न व बकरीद के अवसर पर जिले में बड़ी घटना हो सकती है. इसे रोकने की नीयत से ही डीएम व एसपी ने रणनीति बनायी थी. हालांकि जदयू नेता शैलेंद्र प्रताप, विधायक रणधीर सिंह, भाजपा नेता कन्हैया सिंह तथा अन्य बुद्धिजीवियों के प्रयास से 10.30 बजे के बाद हिरासत में लिये गये लोगों को छोड़ने के साथ-साथ प्रशासन ने विधिवत प्रतिमाओं का विसजर्न भी कराया. हालांकि प्रतिमा विसजर्न के दौरान प्रतिमाओं को रोके जाने की कथित रूप से प्रशासनिक कार्रवाई व कुछ पूजा समितियों के सदस्यों को हिरासत में लेने की कार्रवाई ने ही प्रशासन के शांति के प्रयासों पर पानी फेर दिया तथा भीड़ में उपद्रवी अपने मंसूबों को अंजाम देने में सफल हुए.
