कबीर के विचार को फैलाने की जरूरत

* सोनपुर में तीन दिवसीय सत्संग समारोह का मुख्यमंत्री ने किया उद्घाटनसोनपुर : जिसने दिल से कबीर की वाणी को नहीं समझा और उनकी वाणी को आत्मसात नहीं किया, वह कभी सच्चा कबीर भक्त नहीं हो सकता. उक्त बात सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोनपुर में आयोजित कबीर जन जागरण मंच के तीन दिवसीय […]

* सोनपुर में तीन दिवसीय सत्संग समारोह का मुख्यमंत्री ने किया उद्घाटन
सोनपुर : जिसने दिल से कबीर की वाणी को नहीं समझा और उनकी वाणी को आत्मसात नहीं किया, वह कभी सच्चा कबीर भक्त नहीं हो सकता. उक्त बात सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोनपुर में आयोजित कबीर जन जागरण मंच के तीन दिवसीय सत्संग समारोह के उद्घाटन अवसर पर कही.

उन्होंने कहा कि समाज में छोटा, बड़ा, ऊंच-नीच के भेदभाव को समाप्त कर एक समरस समाज की स्थापना करना ही कबीर का सोच था. उन्होंने कहा कि दिखावे के लिए गंगा स्नान एवं पूजा-पाठ करने से मनुष्य का पाप नहीं कटता. कबीर ने समाज की वर्ण व्यवस्था पर आज की कल्पना करते हुए प्रहार किया था.

ज्ञानी तो कोई भी हो सकता है. इसके लिए जाति, धर्म, वर्ग या विशेष संप्रदाय का होने का कोई महत्व नहीं. कबीर ने जो भी कहा, वो आज प्रशंसनीय है और उनके विचारों ने पूरे समाज को सोचने पर विवश किया था. उन्होंने समाज को सच्चाई बतायी, अपनी वाणी से समाज की बुराइयों एवं कुरीतियों पर सीधा प्रहार किया.

उनका मानना था कि भगवान के समक्ष पूजा के लिए नहीं, बल्कि अपनी गलतियों की माफी के लिए जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि कबीर के विचारों को कबीरपंथियों द्वारा पूरा प्रचार प्रसार नहीं किया जा सका और ना ही उनकी वाणी को ही आगे बढ़ाया.

नहीं तो, निश्चित ही समाज में फैली कुरीतियां दूर हो जातीं. उन्होंने कबीर पंथियों पर भी प्रहार करते हुए कहा कि कबीरपंथी कबीर बनने से अधिक मठ का महंत बनने के लिए आपस में झगड़ते रहे और यही कारण है कि कबीर के उद्देश्य व वाणी को नहीं फैलाया नहीं जा सका. यदि उनकी वाणी का सही प्रचार-प्रसार किया गया होता, तो आज लोगों में अच्छे विचार व संस्कार रहते.

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की जनता ने उन्हें शासन के लिए नहीं, सेवा के लिए सत्ता सौंपी है और वे जनता की सेवा कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सत्य मृत्यु है. जो आया है उसे मृत्यु को प्राप्त होना ही है. मेरी माने तो मृत्यु जिंदगी की अमानत है.

जिंदगी में इतनी आपाधापी है कि पैसा कमाने में ही जीवन बीत जाता है. जबकि सच्चई यह है कि सबों को खाली हाथ ही ऊपर जाना है. लोग दो नंबर की कमाई व भ्रष्टाचार में लिप्त हैं. भले ही उसे भोगने के लिए वे नहीं रह पायेंगे. इसी मनोवृति पर संत कबीर सोचते थे और उस पर उन्होंने काबू भी पा लिया था.

* जनता की कर रहे हैं सेवा
उन्होंने कहा कि अपने अंदर के कबीर को उभारिये और पहचानिए तथा उनकी वाणी को अपने जीवन में आत्मसात करें, तभी जाकर स्वयं का एवं समाज व देश का भला हो सकता है. मुख्यमंत्री ने कहा कि मुङो पहली बार कबीर पंथ के सम्मेलन में आने का मौका मिला है और मैं सम्मेलन की सफलता की कामना करता हूं. हम सब राजनीतिक दल के हैं.

हमलोगों के बीच भी विवाद होते रहते है. लेकिन कबीरपंथी हमसे अलग हैं. उन्हें महंत बनने के लिए आपस में नहीं झगड़ना चाहिए. कबीर के विचार ने संपूर्ण समाज को सोचने पर विवश किया और आज भी उनकी वाणी प्रासंगिक है. मुख्यमंत्री ने मौके पर कहा कि मैं बचपन से कबीर पंथी संतों को देखता आ रहा हूं. मेरे पिताजी वैद्य थे और बख्तियारपुर में चिकित्सा कार्य करते थे.

हमलोगों का जन्म एवं लालन-पालन बख्तियारपुर में ही हुआ. हमारे घर के सामने जो परिवार रहता था, वे कबीर पंथ के ही थे. उनके यहां भजन गायन एवं कीर्तन होता रहता था, जो हमलोगों को सुनाई पड़ता था. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में आने के बाद भी कबीर पंथी मठ में जाने का मौका मिला है. कबीर दास की वाणी को जानने एवं सुनने का मौका मिला है.

* बिहार का हो रहा है विकास
इस अवसर पर पंथ श्री 1008 अर्धनाम साहब ने कहा कि आज सोनपुर की पावन धरती पर सब गुरु कबीर साहब का सत्संग का आयोजन हो रहा है. इस अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने पधार कर सत्संग समागम के महत्व को बढ़ा दिया है. उन्होंने कहा कि आज का बिहार एवं इतिहास का बिहार कैसा रहा होगा. उन्होंने कहा कि धर्म एवं राष्ट्र के अगुवा अच्छे व्यक्तित्व के होते हैं, तो राष्ट्र का सामाजिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक विकास होता हैं.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार का सामाजिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक विकास हो रहा हैं. इस अवसर पर श्रम संसाधन मंत्री श्री जर्नादन सिंह सीग्रीवाल एवं धार्मिक न्यास परिषद् के अध्यक्ष आचार्य किशोर कुणाल ने भी विचार व्यक्त किये. इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने पंथ श्री अर्धनाम साहब को पुष्प हार पहना कर उन्हें सम्मानित किया.

पंथ श्री अर्धनाम साहब ने मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार को शाल ओढ़ा कर, धार्मिक ग्रंथ एवं प्रतीक चिह्न् भेंट कर आशीर्वाद दिया. इस अवसर पर मंच संचालन महंत सुक्ति साहब ने किया. इस अवसर पर धर्माधिकारी सर्वश्री सुधाकर साहब, गुरुचरण साहब, महंतखेम दास साहब, कालू सेठजी, संतोष जी, हनुमंत साहब,आयोजन समिति के महामंत्री श्री सुधीर कुमार सिंह उर्फ टूटू जी आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री हरिहर भगत, आयोजन समिति के आयोजक श्री महंत सिंधु मुनीनाम साहब, अगम जी तथा श्री महंत देवेंद्र साहब समेत हजारों की संख्या में कबीर पंथी भक्त एवं श्रद्धालु तथा आम नागरिक उपस्थित थे.

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