संवाददाता
छपरा (नगर):जेपीविवि के कुलपति प्रो. द्विजेंद्र गुप्ता के विवि में योगदान के बाद संपन्न परीक्षाओं में कदाचार पर अंकुश लगाने के लिए काफी संख्या में परीक्षार्थियों का निष्कासन खुद विवि की शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलता दिख रहा है. वैसे, इस दौरान कई छात्र संगठनों द्वारा कॉलेजों में क्लास नहीं चलने को लेकर आवाज उठाया जाता रहा है.
लेकिन, विवि प्रशासन इस मामले पर चुप्पी साधे हुआ है. वैसे विवि के अंगीभूत कॉलेजों की बात करें, तो वहां हर साल नामांकन के समय छात्रों को 75 प्रतिशत उपस्थित को अनिवार्य बताते हुए उनसे एक शपथपत्र पर हस्ताक्षर तो करा लिये जाते हैं, मगर सच्चई यही है कि शिक्षकों की कमी के कारण वहां इतना क्लास ही नहीं चल पाता है कि छात्रों की उपस्थित 75 प्रतिशत पहुंच सके.
आधे से भी कम शिक्षक : जेपीविवि के सिर्फ अंगीभूत कॉलेजों को ही बानगी मानें, तो शिक्षकों के मामले में ज्यादातर की हालत खस्ता है. विवि के प्रीमियर कॉलेज माने जानेवाले राजेंद्र कॉलेज में 157 सृजित पदों के विरुद्ध मात्र 41 शिक्षक ही कार्यरत हैं. वहीं जगदम कॉलेज में 83 के विरुद्ध मात्र 34, शहर के प्रतिष्ठित जेपीएम कॉलेज में 35 की जगह मात्र 15, तो गंगा सिंह कॉलेज में 29 के विरुद्ध नौ शिक्षकों पर क्लास लेने की जिम्मेवारी है. उधर, कार्यरत शिक्षकों पर इंटर से लेकर स्नातक तक का क्लास लेने का दबाव है. ऐसे में सवाल उठता है कि एक शिक्षक कहां-कहां पढ़ाएं.
