Arhar Farming Tips: समस्तीपुर जिले के मौसम पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दिनों में मुख्यतः 8 से 10 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हवाएं चलने की संभावना है. इस अनुकूल वातावरण को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के लिए फसलवार सामयिक सलाह और प्रबंधन के निर्देश जारी किए हैं. किसान इस बदलते मौसम में अपनी फसलों की उचित देखरेख कर सकते हैं.
Agriculture News: अरहर की खेती और उन्नत किस्में
किसान अरहर की बोआई 15 सितंबर तक अनिवार्य रूप से पूरी कर लें. इसके लिए उपयुक्त किस्में शरद पूसा 9 और राजेंद्र अक्षर-1 हैं. ऊपरी भूमि या धान की रोपाई से खाली पड़े खेतों के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प है. बीज दर 45 से 60 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखें. बोआई के 25 से 30 दिन बाद 10 किलोग्राम नत्रजन प्रति हेक्टेयर देकर निराई-गुड़ाई करें.
धान की फसल में कीट व रोग नियंत्रण
धान की फसल में लीफ फोल्डर का प्रकोप दिखने पर क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 4% जी का प्रयोग देर दोपहर के बाद करें. भूरा माहू का अत्यधिक प्रकोप होने पर इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव करें. खैरा रोग का लक्षण दिखने पर 5 किलोग्राम जिंक सल्फेट और 2.5 किलोग्राम चूना को 500 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर पर्णीय छिड़काव करें. गंधी बग कीट के नियंत्रण हेतु फोलिडोल डस्ट का भुरकाव सुबह या देर शाम करें.
शकरकंद और टमाटर की खेती
शरदकालीन शकरकंद की रोपाई के लिए उचित जल निकास वाली हल्की बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त है. अनुशंसित किस्मों में राजेंद्र शकरकंद-5 और श्री भद्रा शामिल हैं. इसके अलावा शरदकालीन टमाटर की नर्सरी व रोपाई के लिए यह उपयुक्त समय है. उन्नत किस्मों में अर्का विकास और पूसा रूबी का चयन करें. संकर किस्म के लिए बीज दर 150 से 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर रखें.
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