Education news from Samastipur:वेतन से वंचित शिक्षकों के लिए होगा सैलरी मेला का आयोजन

अपनी कार्यशैली को लेकर सुर्खियों में रहने वाले डीपीओ स्थापना संभाग फिर से एक बार चर्चा में है. चार माह से वेतन से वंचित शिक्षकों को लेकर आखिर विभाग की कुंभकर्णी निद्रा भंग हुई है.

Education news from Samastipur:समस्तीपुर : अपनी कार्यशैली को लेकर सुर्खियों में रहने वाले डीपीओ स्थापना संभाग फिर से एक बार चर्चा में है. चार माह से वेतन से वंचित शिक्षकों को लेकर आखिर विभाग की कुंभकर्णी निद्रा भंग हुई है. जिला शिक्षा विभाग का डीपीओ स्थापना संभाग ने वेतन से जिला में वंचित शिक्षकों के लिए बीइओ से प्रपत्र में जानकारी की मांग की है. बीते बुधवार को पत्र जारी करते हुए डीपीओ स्थापना संभाग ने सक्षमता प्रथम उत्तीर्ण वैसे शिक्षक जिनका योगदान वैध है उन्हें जनवरी माह से वेतन भुगतान नहीं हुआ हो वैसे वंचित शिक्षकों का डाटा विहित प्रपत्र में आवेदन नंबर, प्रान नंबर, मोबाइल नंबर,पैन नंबर आदि का जानकारी प्रत्येक कार्य दिवस में देने हेतु निर्देशित किया गया है. इसके लिए प्रतिदिन सैलरी मेला का आयोजन किये जाने की बात कही गयी है. सूत्रों का कहना है कि डीपीओ स्थापना कार्यालय के कार्यशैली के कारण शिक्षकों को चार माह से वेतन नहीं मिल सका है.

चार माह बाद विभाग ने की पहल, शिक्षकों में आक्रोश

माह जनवरी में ही विभाग ने विशिष्ट शिक्षकों के योगदान उपरांत वेतन भुगतान के लिए आवश्यक तैयारी किये जाने का निदेश दिया था. लेकिन इसके बावजूद जिला शिक्षा विभाग ने आवश्यक तैयारी नहीं की. जिला में अभी भी चार सौ के करीब शिक्षकों का वेतन भुगतान नहीं किया जा सका है. जानकारों की माने तो निदेशालय के कमांड एंड कंट्रोल में प्रतिदिन पहुंच रही शिक्षकों की समस्या पर संज्ञान लेते हुए विभाग ने सभी जिला को सैलरी मेला के आयोजन को लेकर निर्देश दिया है. अब देखना है की सैलरी मेला से शिक्षकों के समस्या का निदान होता है या विभागीय खानापूर्ति. इस पर शिक्षकों की निगाहें टिकी हुई है. इधर, सीमावर्ती जिला में विशिष्ट शिक्षकों को वेतन निर्धारण को लेकर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है. वही इस जिला में अभी तक पत्र भी जारी नहीं किये जाने से शिक्षकों में काफी रोष देखने को मिल रहा है. बताते चलें कि प्रारंभिक में वेतन निर्धारण नहीं होने से अधिकांश शिक्षक पहले मिल रहे वेतन से करीब आठ से दस हजार कम वेतन उठाने को विवश हैं.

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By PREM KUMAR

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