Rosera Sahitya Sangam: रोसड़ा स्थित सरस्वती विद्या निकेतन परिसर में 'साहित्य संगम, रोसड़ा' की नियमित मासिक काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया. इस दौरान देशप्रेमी, समसामयिक, सामाजिक और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित रचनाओं के पाठ ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया. कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के निदेशक लक्ष्मी नारायण झा ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर किया. गोष्ठी की अध्यक्षता अनिरुद्ध झा 'दिवाकर' ने की और संचालन महासचिव संजीव कुमार सिंह ने किया.
'संघर्ष' पुस्तक का लोकार्पण रहा मुख्य आकर्षण
इस काव्य गोष्ठी का मुख्य आकर्षण कवि विजय कुमार कुशवाहा के प्रथम काव्य संग्रह 'संघर्ष' का लोकार्पण रहा. इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों से आए कवियों ने अपनी प्रभावी रचनाओं से खूब तालियां बटोरीं.
कवियों की प्रस्तुतियां और प्रमुख विषय:
- सरस्वती वंदना व राम मंदिर: मनोज कुमार झा 'शशि' ने सरस्वती वंदना और राम मंदिर पर रचना पढ़ी.
- अध्यक्षीय काव्य: अनिरुद्ध झा 'दिवाकर' की पंक्तियों "जिस पर किया कभी था नाज, देखो बना वही अब बाज" पर पूरा सभागार गूंज उठा.
- व्यंग्य व शासन व्यवस्था: विजय कुमार कुशवाहा ने शासन व्यवस्था और बैद्यनाथपुर के जगमोहन चौधरी ने विकास के दावों पर करारा व्यंग्य किया.
- ग़ज़ल व समसामयिक: नक्की खां 'समस्तीपुरी' की ग़ज़लों और कृष्ण कुमार सिंह की समसामयिक रचनाओं को काफी सराहना मिली.
- युद्ध व मानवता: संजीव कुमार सिंह ने युद्ध और मानवता पर केंद्रित कविता से शांति का संदेश दिया.
- अन्य रचनाएं: कृष्ण कुमार चौधरी (उलझनों से जीत), मैथिली माधव (मां), तथा रामस्वरूप सहनी व तृप्ति नारायण झा ने पावस ऋतु पर सुंदर काव्य पाठ किया.
कार्यक्रम के अंत में संस्था के उपाध्यक्ष रामस्वरूप सहनी 'रोसड़ाई' ने धन्यवाद ज्ञापन किया और अध्यक्ष ने गोष्ठी के समापन की घोषणा की.
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