National Library Day: अंतरराष्ट्रीय युवा एवं राष्ट्रीय पुस्तकालय दिवस के अवसर पर बुधवार को संत जोसेफ्स मिश्री सिंह विश्व मोहिनी मेमोरियल शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में मानव निर्माण एवं पुस्तकालय की भूमिका विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई. कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. सुप्रिया कुमारी, प्रभारी प्राचार्य ऋतुराज पांडेय एवं एचओडी अंगद कुमार सिंह सहित व्याख्याताओं और प्रशिक्षुओं ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा डॉ. एसआर रंगनाथन के चित्र पर माल्यार्पण कर किया. इसके बाद सभी ने डॉ. रंगनाथन को श्रद्धांजलि अर्पित की.
डॉ. एसआर रंगनाथन के योगदान को किया याद
कार्यक्रम में मंगलाचरण एवं सरस्वती वंदना की प्रस्तुति महाविद्यालय के व्याख्याता राजेश कुमार राजन ने की. कार्यक्रम का संचालन व्याख्याता इश्तियाक हुसैन एवं बीएड प्रथम वर्ष की प्रशिक्षु ईशा कुमारी ने किया.
संस्था के चेयरमैन अनिल कुमार सिन्हा ने दूरभाष के माध्यम से प्रशिक्षुओं को शुभकामनाएं दीं. उन्होंने कहा कि युवाओं को डॉ. एसआर रंगनाथन के जीवन और कार्यों से प्रेरणा लेकर समाज एवं राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए सदैव प्रयासरत रहना चाहिए.
पुस्तकालय विज्ञान को नई दिशा देने में रंगनाथन की भूमिका
संगोष्ठी की अध्यक्षता महाविद्यालय के पुस्तकालयाध्यक्ष-सह-अध्यक्ष अरविंद कुमार ने की. उन्होंने डॉ. एसआर रंगनाथन के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने पुस्तकालय विज्ञान के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया.
उन्होंने बताया कि डॉ. रंगनाथन की कोलन वर्गीकरण पद्धति एवं क्लासिफाइड कैटलॉग कोड ने पुस्तकालय विज्ञान को नई दिशा प्रदान की. अरविंद कुमार ने डॉ. रंगनाथन के सृजनात्मक योगदान, उनकी पुस्तकों, शोध-पत्रों और जन-ग्रंथालय से जुड़े कार्यों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला.
पुस्तकों से मिलती है अलग पहचान बनाने की प्रेरणा
डॉ. श्वेता कुमारी ने कहा कि पुस्तकालय में रखी पुस्तकें हमें यह सिखाती हैं कि भीड़ में भी अपनी प्रतिभा और काबिलियत के बल पर अलग पहचान बनाई जा सकती है.
बीएड एवं डीएलएड प्रशिक्षु अंकित राज ने कविता के माध्यम से पुस्तकों और पुस्तकालय के महत्व को रेखांकित किया.
राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर चर्चा
संगोष्ठी में अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के संदर्भ में युवाओं की भूमिका, जिम्मेदारी, शिक्षा और राष्ट्र निर्माण में उनकी भागीदारी पर भी चर्चा की गई.
वक्ताओं ने कहा कि ज्ञानवान, जागरूक और संस्कारवान युवा ही सशक्त राष्ट्र के निर्माण की आधारशिला हैं. युवाओं के व्यक्तित्व एवं मानव निर्माण में पुस्तकालय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. पुस्तकें युवाओं को ज्ञान के साथ सोचने, समझने और समाज के प्रति जिम्मेदार बनने की प्रेरणा देती हैं.
शिक्षकों और प्रशिक्षुओं ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय के व्याख्याता डॉ. सरिता कुमारी, अंगद कुमार सिंह, ऋतुराज पांडेय, राजेश कुमार राजन, आजाद कुमार सिंह, विकास कुमार, चंद्रहास सिंह यादव, पंकज कुमार, इश्तियाक हुसैन, रेखा कुमारी, वंदना कुमारी, कुमारी अमन एवं प्रियंका सहित कार्यालय कर्मियों नरेंद्र चौधरी, रजनीश कुमार, खुशबू कुमारी, रवि कुमार एवं विकास कुमार झा की महत्वपूर्ण भूमिका रही.
