Pusa Ram Vivah: महाकालेश्वर मंदिर मालीनगर में रामधुन अष्टयाम के समापन के उपरांत रात्रि में सम्पूर्ण राम विवाह का प्रसंग अत्यंत भक्तिमय और उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ. मिथिला की सांस्कृतिक परंपरा के अनुसार भगवान श्री राम और माता सीता के दिव्य गठबंधन का सजीव वर्णन किया गया. चौबीस घंटे तक चले अनवरत रामधुन अष्टयाम के पूर्ण होने पर पूरा मंदिर परिसर पवित्र और चैतन्य हो गया.
पारंपरिक सोहर, गारी और मंगल गीतों से गूंजा परिसर
मंगल गान के दौरान महिलाओं द्वारा पारंपरिक सोहर, गारी और मंगल गीत गाए गए, जिससे पूरा मंदिर परिसर मिथिला नगरी सा प्रतीत होने लगा. राजा जनक के दरबार में अष्टयाम की कथा के क्रम में गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर श्री राम द्वारा शिव धनुष उठाने की लीला का सजीव प्रदर्शन किया गया. धनुष भंग होते ही जय-जयकार गूंज उठी और माता सीता ने प्रभु राम को वरमाला पहनाई.
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुई विवाह की रस्में:
- हस्तमिलाप व गठबंधन: वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रीराम और माता सीता का हस्तमिलाप व गांठ-बंधन कराया गया.
- पुष्प वर्षा: भारी संख्या में उपस्थित भक्तजनों और आचार्यों ने भगवान के चरणों में पुष्प वर्षा की.
- सिंदूरदान रस्म: रात्रि के पावन पहर में सिंदूरदान की रस्म पूरी की गई.
इस अवसर पर मुख्य यजमान विजय कुमार झा के अलावा सैकड़ों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे.
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