Samastipur News: समस्तीपुर जिले के मोरवा प्रखंड में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर सवाल उठाए हैं. लोगों का आरोप है कि केंद्रों पर बच्चों की वास्तविक उपस्थिति काफी कम रहती है, लेकिन रिकॉर्ड में शत-प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की जाती है. इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने वरीय अधिकारियों से शिकायत कर जांच की मांग की है.
जर्जर झोपड़ियों में चल रहे केंद्र
स्थानीय लोगों का कहना है कि विभिन्न पंचायतों में सरकारी खर्च से बने कई आंगनबाड़ी भवन वर्षों से अनुपयोगी पड़े हैं, जबकि बच्चों की पढ़ाई और पोषण व्यवस्था जर्जर झोपड़ियों में चलाई जा रही है.
ग्रामीणों का आरोप है कि इन झोपड़ियों का किराया भी हर महीने भुगतान किया जाता है और इसमें विभागीय कर्मियों व अधिकारियों की मिलीभगत है.
उपस्थिति और पोषाहार पर सवाल
दिनेश प्रसाद यादव, गणेश कुमार राय, निरंजन कुमार, रविंद्र कुमार, पुतुल देवी, संजय राय, महेंद्र कुमार, सुशील महतो, पंकज राय और अशोक साह समेत कई लोगों ने आरोप लगाया कि केंद्रों पर 40 बच्चों की उपस्थिति दिखाई जाती है, जबकि मौके पर मुश्किल से 10 से 15 बच्चे ही मौजूद रहते हैं.
लोगों का कहना है कि बच्चों को मीनू के अनुसार भोजन नहीं दिया जाता. अंडा, फल और नाश्ते के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है. आरोप है कि बच्चों के लिए आने वाली सामग्री का सही उपयोग नहीं हो रहा है.
अधिकारियों से जांच की मांग
ग्रामीणों ने इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी, समाज कल्याण विभाग और मुख्य सचिव तक भेजी है. लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की है.
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत समिति की बैठकों में भी कई बार इस मुद्दे को उठाया गया था. अधिकारियों ने व्यवस्था सुधारने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक हालात में कोई बदलाव नहीं हुआ है.
बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता
स्थानीय लोगों ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम हैं, लेकिन बदहाल व्यवस्था के कारण बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है.
लोगों ने मांग की है कि केंद्रों की नियमित निगरानी कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.
समस्तीपुर के मोरवा से मनोज वर्मा की रिपोर्ट
