समस्तीपुर: हिंदी दिवस के अवसर पर संत पॉल टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज वीरसिंहपुर में सांस्कृतिक समिति एवं पाठचर्या समिति के संयुक्त तत्वावधान में नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया. इसका उद्देश्य हिंदी भाषा के प्रति प्रेम, सम्मान और जागरूकता की भावना को जन-जन तक पहुंचाना था. कार्यक्रम में हिंदी को व्यवहार एवं शिक्षा के जीवंत माध्यम के रूप में स्थापित करने पर जोर दिया गया.
कॉलेज से दुर्गा मंदिर तक हुआ नुक्कड़ नाटक
कार्यक्रम सहायक प्राध्यापक नरेंद्र कुमार एवं रोहित कुमार की देखरेख में हुआ. बीएड एवं डीएलएड के प्रशिक्षुओं ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से भाषा, संस्कृति और सामाजिक चेतना से जुड़े विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत किया.
इसमें आयुष, गजाला प्रवीण, अस्मिता, रौशन, सुस्मिता, चांदनी, आयुषी, प्रयास, नीरज, सुमन, कृति, रिशु, तन्नु, अर्पिता, सृष्टि आदि प्रशिक्षुओं ने सहभागिता की. कार्यक्रम कॉलेज परिसर से शुरू होकर वीरसिंहपुर दुर्गा मंदिर पहुंचा, जहां प्रशिक्षुओं ने नुक्कड़ नाटक का मंचन किया.
प्रशिक्षुओं ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से आम लोगों को हिंदी के महत्व के प्रति जागरूक किया. नुक्कड़ नाटक में भाषा, संस्कृति और सामाजिक चेतना से जुड़े संदेशों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया.
हिंदी संस्कृति और पहचान की आधारशिला
इस अवसर पर प्राचार्या डॉ. रोली द्विवेदी ने हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, संस्कार, संवेदना और पहचान की आधारशिला है.
सहायक प्राध्यापिका डॉ. श्वेता द्विवेदी, सहायक प्राध्यापक तहसीन आलम कादरी, सुरेन्द्र कुमार चौधरी, डॉ. अमित कुमार पांडेय एवं चंदन कुमार ने भी हिंदी भाषा की महत्ता पर अपने विचार व्यक्त किये.
वक्ताओं ने कहा कि हिंदी महज संचार का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, लोकजीवन, संवेदना और सामाजिक एकता को जोड़ने वाली सशक्त कड़ी है. नुक्कड़ नाटक ने हिंदी दिवस के आयोजन को महज औपचारिक कार्यक्रम न बनाकर सड़क से समाज और समाज से शिक्षा तक पहुंचने वाले जन-जागरूकता अभियान का रूप दिया.
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