Samastipur News: मोहिउद्दीननगर. गंगा और बाया नदियों के जलस्तर में कमी आने के बावजूद बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं. पानी भले ही खेतों और इलाकों से सरकने लगा है, लेकिन अपने पीछे बर्बादी के निशान छोड़ गया है. सरकार की ओर से बाढ़ पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचायी गयी है, लेकिन किसानों को फसलों के बर्बाद होने की चिंता सता रही है. दियारा क्षेत्र में धान, मक्का और सब्जी की फसल पूरी तरह चौपट होने की बात किसानों ने कही है. खेतों में बालू और कीचड़ जमा होने से अगली खेती को लेकर भी चिंता बढ़ गयी है.
बाढ़ में डूबी फसल, किसानों की उम्मीदों पर पानी
बाढ़ के कारण दियारा क्षेत्र में धान, मक्का और सब्जी की फसल को भारी नुकसान हुआ है. किसानों का कहना है कि खेती से जुड़ी उनकी भविष्य की उम्मीदें भी बाढ़ के पानी में बह गयीं. कई किसानों ने कर्ज लेकर फसल लगायी थी. फसल बर्बाद होने के बाद अब उनके सामने कर्ज चुकाने और परिवार का खर्च चलाने की चुनौती खड़ी हो गयी है.
खेतों में जमा बालू और कीचड़ से बढ़ी परेशानी
पानी उतरने के बाद खेतों में जगह-जगह बालू और कीचड़ जमा है. इससे खेतों को दोबारा खेती के योग्य बनाने में किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. किसानों का कहना है कि सिर्फ राहत सामग्री मिलने से उनकी समस्या का समाधान नहीं होगा. फसल क्षति का आकलन कर उचित मुआवजा दिया जाना जरूरी है.
किसानों ने जीआर राशि और मुआवजे की मांग की
बाढ़ पीड़ित किसानों ने सरकार से जीआर राशि उपलब्ध कराने के साथ फसल क्षति का सर्वे कराने की मांग की है. किसानों का कहना है कि नुकसान का सही आकलन होने के बाद उचित मुआवजा मिलने से उन्हें आर्थिक संकट से उबरने में मदद मिलेगी. कर्ज लेकर खेती करने वाले किसानों के लिए यह सहायता बेहद जरूरी बतायी जा रही है.
गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर
गंगा के जलस्तर में लगातार कमी दर्ज की जा रही है. मोहनपुर प्रखंड के गंगा स्थित सरारी कैंप पर तैनात सहायक अभियंता मनीष कुमार गुप्ता ने सोमवार की शाम बताया कि गंगा का जलस्तर 47.00 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान 45.50 मीटर से 1.50 मीटर अधिक है. उन्होंने जलस्तर की प्रवृत्ति घटने की बतायी.
पानी उतरते ही स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ायी निगरानी
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पानी उतरने के साथ स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमण और विभिन्न रोगों से बचाव के लिए अभियान तेज कर दिया है. प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार और अमित कुमार ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में युद्धस्तर पर ब्लीचिंग पाउडर और चूने का छिड़काव किया जा रहा है. लोगों के बीच हैलोजन टैबलेट का वितरण भी किया जा रहा है. बाढ़ पीड़ितों के लिए मेडिकल कैंप की व्यवस्था पहले की तरह जारी है.
पशुपालकों के लिए सामुदायिक किचन जारी
सीओ विवेक कुमार सिंह और संतोष कुमार ने बताया कि पशुपालकों के लिए सामुदायिक किचन की व्यवस्था अभी जारी है. वहीं अन्य सामुदायिक किचन को सोमवार से बंद कर दिया गया है. प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है.
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