Samastipur News:मतदाताओं को लुभाने के लिए प्रत्याशी लगा रहे एड़ी चोटी का जोर

विधानसभा चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है वैसे- वैसे राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने लगी है.

Samastipur News:अंकुर कुमार, समस्तीपुर : विधानसभा चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है वैसे- वैसे राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने लगी है. सभी राजनीतिक दलों के बड़े नेता अपने क्षेत्रीय उम्मीदवारों के समर्थन में एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है. कहीं रोड शो निकाला जा रहा है तो कहीं चुनावी जनसभाएं हो रही है. चाहे सत्तारूढ़ दल हो या विपक्षी गठबंधन. हर खेमे के नेता चुनावी समर में पसीना बहा रहे हैं. अपने तरीके से मतदाताओं को अपने पक्ष में गोलबंद करने का प्रयास है. दल व प्रत्याशी से नाखुश चल रहे लोगों का मान-मनौव्वल भी होने लगा है. चूंकी, उम्मीदवारों को घात-प्रतिघात की चिंता सता रही है. इस बार नये लड़ाके भी मैदान में कूद लोगों के बीच भ्रष्टाचार, पलायन, बेरोजगारी जैसे मुद्दों की बात कर मतदाता को अपने पक्ष में करने पर उतारू हैं. नये लड़ाके पुराने दिग्गजों के अंदर चल रहे अंतर्कलह व भितरघात का लाभ उठाने को लिए एड़ी-चोटी की जोर लगा रहे हैं. इससे पुराने धुरंधर परेशान हैं. नये लड़ाके चुनावी मैदान में पुराने खिलाड़ियों को लंगड़ी लगाकर बाजी पलट सकते हैं. बता दें कि आगामी 6 नवम्बर को समस्तीपुर जिले में बिहार विधान सभा चुनाव का मतदान है. जैसे-जैसे मतदान की तारीक नजदीक आ रही है. उम्मीदवारों की बेचैनी बढ़ती जा रही है.

चुप्पी से बढ़ी उलझनें

चुनावी समर में ताल ठोक रहे दल व निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी पूरी ताकत झोंक दी है. अपने समर्थकों के साथ गांव मोहल्ले का चक्कर लगा रहे हैं. मतदाताओं को अपने पक्ष में रिझाने लगे हैं. इंटरनेट मीडिया पर भी प्रत्याशियों का चुनाव प्रचार जारी है. कोई खुद को सबसे कर्मठ और ईमानदार बताकर विकास कार्यों को गिनाकर मतदाताओं से अपने पक्ष में मतदान करने की अपील कर रहे हैं, तो कोई भष्टाचार, पलायन और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर मतदाताओं को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रहा है. लेकिन, मतदाता खामोशी की चादर लपेटे हैं. कोई खुल नहीं रहा. उम्मीदवारों को मतदाताओं से बस आश्वासन मिल रहा है. मतदाताओं की खामोशी से प्रत्याशियों की उलझनें बढ़ी हुई है. वह कितने पानी में हैं उन्हें समझ में नहीं आ रहा है. इधर, गांव की गलियों से लेकर शहर में चाय की दुकानों तक चुनावी चर्चा तेज हो गयी है. लोग अपने-अपने तरीके से चुनावी समीकरण बना रहे हैं और उसकी ही चर्चा कर रहे हैं. चाय की दुकान हो या गांव की चौक-चौराहे वहां पर बैठे लोग एक-दूसरे को हराने व जिताने का गुणा गणित समझा रहे हैं.

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Author: ABHAY KUMAR

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