सदर अस्पताल . मरीजों के इलाज पर असर
समस्तीपुर : जिले के सबसे प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शुमार सदर अस्पताल में भी चिकित्सकों की कमी है. स्वीकृत पदों के विरुद्ध महज पचास फीसदी चिकित्सक ही कार्यरत हैं. ऐसे में मरीजों का समुचित इलाज नहीं हो पाता है. विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के कारण जिले के दूर दराज से आनेवाले मरीजों को बिना इलाज कराये ही लौटना पड़ता है. वह शहर के निजी अस्पतालों में मोटी रकम खर्च कर अपना इलाज कराने को मजबूर हैं.
सदर अस्पताल की जब यह स्थिति है, तो जिले के अन्य प्राथमिक, रेफरल एवं अनुमंडलीय अस्पतालों की क्या स्थिति होगी, इसे सहज समझा जा सकता है. जानकारी के अनुसार सदर अस्पताल में चिकित्सकों के कुल 40 पद सृजित हैं. इन पदों का सृजन कई साल पहले हुआ था.
मरीजों की संख्या में इजाफा के साथ ही डॉक्टरों के स्वीकृत पदों में इजाफा किया जाना चाहिए था. स्थिति यह है कि पूर्व से स्वीकृत पदों के विरुद्ध भी चिकित्सक नहीं है. महज 20 चिकित्सकों के भरोसे सदर अस्पताल चल रहा है. चिकित्सकों की कमी का सीधा असर मरीजों पर पड़ता है. सदर अस्पताल में न तो शिशु रोग विशेषज्ञ हैं और न ही चर्मरोग विशेषज्ञ. पैथोलोजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट एवं मानसिक रोग के चिकित्सक भी नहीं हैं. ऐसे में इन मरीजों को शहर के निजी क्लीनिकों में अपनी-अपनी चिकित्सा करानी पड़ती है. मूर्च्र्छा रोग विशेषज्ञ के चार पद स्वीकृत हैं जबकि मात्र एक चिकित्सक पदस्थापित हैं.
सरकार के आदेश पर बहाली को लेकर प्रक्रिया की जा रही है. आरक्षण रोस्टर के आधार पर संविदा के बाद डॉक्टरों की बहाली होनी है. आरक्षण रोस्टर तैयार होते ही इंटरव्यू आयोजित कर डॉक्टरों की बहाली की जायेगी.
डाॅ अवध कुमार, सिविल सर्जन, समस्तीपुर
