कौनी-1 किसानों के लिए जारी गर्भवती महिलाओं व मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद

समस्तीपुर : डाॅ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों को फिर नयी सौगात दी है. यहां के वैज्ञानिकों द्वारा इजाद की गयी कौनी की नयी प्रभेद राजेंद्र कौनी-1 को भारत सरकार के सीयूआरसी से मान्यता मिल गयी है. बिहार सरकार पहले ही इसकी स्वीकृति दे चुकी है. फिलहाल इसका लाभ बिहार के किसानों को […]

समस्तीपुर : डाॅ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों को फिर नयी सौगात दी है. यहां के वैज्ञानिकों द्वारा इजाद की गयी कौनी की नयी प्रभेद राजेंद्र कौनी-1 को भारत सरकार के सीयूआरसी से मान्यता मिल गयी है. बिहार सरकार पहले ही इसकी स्वीकृति दे चुकी है.

फिलहाल इसका लाभ बिहार के किसानों को मिल सकेगा. कौनी की इस नयी प्रभेद में आयरन की अच्छी खासी मात्रा पायी जाती है. यदि गर्भवती महिलाएं इसका सेवन करती हैं, तो उन्हें अलग से आयरन की गोली लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी. आयरन व जिंक के अलावा इस प्रभेद में चार प्रतिशत वसा, 18.25 प्रतिशत प्रोटीन एवं 7.3 फीसदी रेशा है जो अन्य अनाजों से कहीं अधिक है. वैज्ञानिकों का कहना है कि कौनी की इस प्रभेद में रेशा की मात्रा अधिक होने के कारण मधुमेह रोगियों के लिए लाभकारी है. इसके लगातार सेवन से रक्त में शर्करा की मात्रा का स्तर अधिक नहीं हो पाता है. इसके
अलावा कौनी के दाने का दोहरा उपयोग किया जा
कौनी-1 किसानों
सकता है. इसके दाने को पीस कर आटा तैयार कर रोटी बनायी जा सकती है. दाने को उबाल कर इसका उपयोग चावल या फिर खीर बनाने में किया जा सकता है. जरूरी तत्वों को लेकर बच्चों के आहार तैयार करने में भी यह काफी उपयोगी है. यही वजह है कि कौनी औद्योगिक रूप से उपयोग के लिए भी बहुत कारगर है, जिसका सीधा लाभ उत्पादक किसानों को मिलेगा. उत्पादक किसानों को इसकी भरपूर कीमत मिलेगी. इससे किसानों की माली हालत में सुधार होगा.
छह वैज्ञानिकों की टीम ने किया इजाद
डाॅ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के आधा दर्जन वैज्ञानिकों की टीम ने राजेंद्र कौनी-1 की नयी प्रभेद को इजाद करने में अहम भूमिका निभायी है. वैज्ञानिक डाॅ सतीश कुमार सिंह की अगुवाई में डाॅ एसके वाष्णेय, डाॅ एनके सिंह, डाॅ अरविंद कुमार सिंह, डाॅ पीपी सिंह और डाॅ राजेश रंजन ने कड़ी मेहनत के बाद बीज को स्वीकृति के लिए विश्वविद्यालय के समक्ष प्रस्तुत किया. इसकी जांच परख करने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रभेद को स्वीकृति के लिए भारत सरकार के सीयूआरसी और बिहार सरकार के समक्ष रखा था. 31 जनवरी को भारत सरकार ने बिहार के किसानों के लिए राजेंद्र कौनी-1 को स्वीकृति प्रदान कर दी.
असिंचित क्षेत्र के लिए वरदान
कौनी की यह नयी प्रभेद असिंचित क्षेत्र के किसानों के लिए वरदान है. इसे इजाद करनेवाले वैज्ञानिकों का बताना है कि इसकी खेती हर तरह की मिट्टी में की जा सकती है. धान व गेहूं के मुकाबले आधा खाद व उर्वरकों की आवश्यकता होती है. यह रोग व कीटों के लिए प्रतिरोधी प्रभेद है. 80 दिनों में तैयार होनेवाली नयी प्रभेद असामान्य वर्षा व तापमान में भी प्रति हेक्टेयर 25 क्विंटल तक उपज देनेवाली है. इसकी बोआई अप्रैल से जुलाई के बीच की जा सकती है.
चावल जैसी दिखनेवाली कौनी में
है सेहत का खजाना
औद्योगिक रूप से उपयोग के कारण किसानों को मिलेगी अच्छी कीमत
किसानों के लिए सािबत होगी वरदान
डाॅ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ आरसी श्रीवास्तव कहते हैं कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक किसानों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभाने में जुटे हैं. बेहतर बीज उपलब्ध करा कर किसानों को अच्छी आय दिलाने के लिए विश्वविद्यालय कृषि के हर क्षेत्र में उन्नत बीज तैयार करने में जुटा है. राजेंद्र कौनी-1 प्रभेद असिंचित क्षेत्र के किसानों के लिए वरदान साबित होगा. औद्योगिक उपयोग के कारण इसकी अच्छी कीमत मिलेगी. किसान नये प्रभेद लगाकर बेहतर कमाई कर सकते हैं. उत्पादक किसान इसके लिए सीधे विश्वविद्यालय से संपर्क कर सकते हैं. उन्हें पूरी मदद दी जायेगी.

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