समस्तीपुर : सरस्वती पूजा की तैयारी जोरों पर चल रही है़ मूर्तिकार मां सरस्वती की प्रतिमा बनाने में दिन रात मेहनत कर रहे है़ं पर रोज रोज बढती महंगाई और मौसम की मार के कारण मूर्तिकारों को मूर्ति बनाने में कई प्रकार की परेशानी आ रही है़ मूर्तिकारों का कहना है कि सभी सामान का दाम काफी बढ़ गया है पर लागत के अनुसार पैसा नहीं मिल रहा है़ एक सामान्य आकार की मूर्ति महज 600 से 700 रुपये में बिक पाती है जबकि उसकी लागत 400 से 650 रुपये तक होती है़
चूंकि उनका यह खानदानी पेशा है और उनके पास कोई दूसरा कमाई का जरिया नहीं होने के कारण किसी तरह वे मूर्ति बना कर ही परिवार का जीवन यापन कर रहे है़ं सरकार भी उनकी हालत पर कोई ध्यान नहीं देती है़ अगर यह स्थिति रही तो समय दूर नहीं जब कोई भी मूर्ति बनाने वाला नहीं मिलेगा़ इससे इतर इस वर्ष बसंत पंचमी 1 फरवरी को है़ इस मौके पर लोग खासकर छात्र विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की पूजा करते हैं़ सरस्वती पूजा को लेकर मूर्ति निर्माण में लगे मूर्तिकार प्रतिमाओं को अंतिम रुप देने में लगे हैं़ ग्रामीण क्षेत्रों में एक से एक कलाकार मूर्ति निर्माण की कला में निपुण हैं़
आकर्षक मूर्ति निर्माण होते देख लोग स्तब्ध हैं़ वहीं सालभर की कमाई मूर्ति बनाकर उसे बेचकर हीं कलाकार करते हैं़ जिससे बच्चों का भरण पोषण से लेकर पढ़ाई लिखाई से लेकर शादी ब्याह तक करते हैं़ प्रखंड मुख्यालय के जितवारपुर में आकर्षक मूर्ति कलाकारों के द्वारा जो बनाया जा रहा है़ मूर्तिकार रामचंद्र पंडित बताते हैं कि उनके हाथों से बनी मूर्तियां गया जिले के कई क्षेत्रों के लोग लेने आते हैं़ श्री पंडित का कहना है कि मूर्तियों को बेचकर हीं सात आठ परिवारों का भरण पोषण करते हैं़ नोटबंदी का असर इस कला से जुड़े लोगों के व्यवसाय पर भी पड़ा है़ बावजूद करीब सवा दो सौ सरस्वती देवी की छोटी बड़ी और मांग के अनुरूप प्रतिमाएं तैयार है़ं
