गुस्सा. प्रतिनियुक्ति रद्द होने के बाद योगदान में फंसा लोचा
वर्षों से इमरजेंसी में काम कर रहे यक्ष्मा केंद्र के कर्मियों को वापस भेजने पर नहीं लिया गया योगदान
समस्तीपुर : प्रतिनियुक्ति रद्द होने के बाद विरमित किये गये सदर अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों के योगदान में अब लोचा फंस गया है. उनके अपने ही विभाग में अब उनका कोई काम नहीं रह गया है. इस कारण जिला यक्ष्मा केंद्र के पांच कर्मी योगदान देने के लिए इधर-उधर पेंडूलम की तरह डोल रहे हैं. उनमें व्यवस्था के खिलाफ आक्रोश भी फूट पड़ा है. शनिवार को विरमित होने के बाद जब एसीएमओ के समक्ष जिला यक्ष्मा केंद्र में योगदान देने के लिए कर्मी पहुंचे, तो इनका योगदान नहीं लिया गया.
इसके बाद आक्रोशित इन स्वास्थ्य कर्मियों ने राम नरेश कुमार एवं वीरेंद्र झा के नेतृत्व में डीएस डॉ एएन साही के समक्ष हंगामा किया. कर्मी राम नरेश कुमार का कहना था कि छह कर्मियों का पदस्थापन यक्ष्मा केंद्र में हुआ था. वहीं से हमें वर्ष 2007 से वेतनभत्ता आदि प्राप्त हो रहा है. लेकिन हमेशा से हमारा काम अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लिया गया. इसकी प्रतिनियुक्ति से संबंधित
कोई लिखित आदेश भी नहीं दिया गया था. अस्पताल प्रशासन द्वारा छह में पांच कर्मियों को यह कहते हुए पत्र थमा दिया गया कि आपका स्थापना जिला यक्ष्मा केंद्र है, इसलिए आपको वहां वापस किया जाता है. इस पत्र के आलोक में जब शनिवार को कर्मी अपना योगदान देने जिला यक्ष्मा केंद्र पहुंचे, तो वहां योगदान लेने से मना कर दिया गया. इस वजह से ये कर्मी न तो यक्ष्मा केंद्र में योगदान दे पा रहे हैं और न ही इमरजेंसी में अपनी ड्यूटी दे पा रहे हैं.
