जांच घर. मनमानी राशि वसूल रहे संचालक, बिना जरूरत भी करायी जा रही जांच
समस्तीपुर : जिले में गरीबों का दम निकाल रहे हैं जांच केंद्र के संचालक. मामूली टीसी/डीसी जांच के बदले भी सैकड़ों रुपये वसूले जा रहे हैं. बिना जरूरत भी मरीजों को डॉक्टर जांच लिख रहे हैं. डॉक्टर द्वारा बताये गये जांच घर में जांच नहीं करायी गयी, तो उक्त जांच रिपोर्ट को संबंधित डॉक्टर मानते नहीं. फलस्वरूप मरीजों को उनके द्वारा बताये गये जांच केंद्र में जाकर ही जांच करानी पड़ती है.
इसके संचालक मरीजों से मनमाना जांच फीस वसूलते हैं. हाल ही में बिथान के रमेश दास ने शहर के काशीपुर स्थित एक निजी डॉक्टर के यहां उपचार कराया. उसे लंबे समय से सर्दी खांसी थी. उक्त डॉक्टर द्वारा लिखे गये जांच से वह दंग रह गया. डॉक्टर ने टीसी/डीसी के अलावा हिमोग्लोबीन, ब्लड ग्रुप, कालाजार व एसटीपीसी की जांच कराने को कहा. जब वह जांच केंद्र पहुंचा तो उसे बताया गया कि सभी जांच की फीस 35 सौ रुपये जमा कीजिए. यह तो चंद एक उदाहरण है. इस तरह के कई
मामले रोज शहर में चर्चा का विषय बने रहते हैं.
डॉक्टरों तक जांच केंद्र वाले पहुंचाते हैं हिस्सा : जांच केंद्रों के कई संचालकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि जांच के बदले डॉक्टरों को कमिशन नहीं दें, तो उनके जहां डॉक्टर व उनके कंपाउंडर मरीज ही नहीं भेजेंगे.जांच पर होने वाले खर्च से दोगुना तो उन्हें देना पड़ता है. कई डॉक्टरों ने अपने नर्सिंग होम में ही टेक्निशियन को बिठाकर जांच केंद्र खोल लिया है. एक संचालक बताता है कि प्रगेनेंसी जांच किट दस रुपये में मिलता है. जांच का फीस दो सौ रुपये तक वसूला जाता है. चुकी डॉक्टर को सौ रुपये देनी पड़ती है.
अलग-अलग जांच केंद्रों की अलग-अलग रिपोर्ट : जितवारपुर के मोहन कुमार बताते हैं कि उन्होंने शहर के बंगाली टोली स्थित एक जांच केंद्र में अपनी पत्नी का ब्लड ग्रुप की जांच कराया. ब्लड का ग्रुप ए पॉजिटिव दिया गया. शक होने पर दरभंगा के जांच केंद्र में ग्रुप चेक कराया, तो बी पॉजिटिव बताया गया. फिर समस्तीपुर एक महिला चिकित्सक की क्लीनिक स्थित केंद्र में जांच कराया, तो ग्रुप बी पॉजिटिव बताया गया.
डॉक्टरों को भी पहुंचाया जाता है उसका हिस्सा
जिले में 80 निबंधित जांच केंद्र
जांच केंद्रों की निगरानी के लिए कमेटी
सिविल सर्जन डॉ अवध कुमार ने बताया कि जांच केंद्रों पर निगरानी के लिए जिला में कमेटी बनी हुई है. किसी जांच केंद्र पर शक होने अथवा शिकायत मिलने पर जांच कर कार्रवाई की जाती है. हाल ही में जांच केंद्रों के संचालकों की ट्रेनिंग भी करायी गयी है. इसमें उन्हें बताया गया है कि कौन-कौन सी जांच वे कर सकते हैं. और कौन-कौन सी जांच करने पर प्रतिबंध है.
