बर्बादी. जिले के थानों में जब्त व बरामद वाहनों की नीलामी का इंतजार
बरामद व जब्त वाहनों की सालों से नहीं हुई नीलामी
जिले के 31 थानों में से 29 थानों में पड़ी हैं सैकड़ों गाड़ियां
नीलामी की जटिल प्रक्रिया व कई अन्य कारणों से आगे नहीं आना चाहते हैं थानाध्यक्ष
समस्तीपुर : जिले के विभिन्न थानों में लावारिस अवस्था में बरामद व अलग-अलग कांडों में जब्त की गयी सैकड़ों गाड़ियां उचित रखरखाव एवं नीलामी नहीं होने के कारण सड़ गयी है. इन गाड़ियों की कीमत कभी करोड़ों में थी, आज कबाड़ में भी बिकने के लायक नहीं रह गयी हैं. जिलेभर के थानों में ये जब्त वाहन खुले में पड़े हैं, जो बारिश, धूप में खराब हो रहे हैं. हर थानों में 20 से 25 बाइक व पांच से आठ चौपिहया व बड़े वाहन सालों से खड़े-खड़े कबाड़ बन चुके हैं. कई बड़े वाहनों के ढांचे भी सड़ कर मिट्टी बन चुके हैं.
इन थानों में विकट स्थिति : जिले के कुल 31 थानों में से 29 थानों में सैकड़ों की संख्या में वाहन जब्त हैं. खासकर, नगर थाना एवं मुफस्सिल थाना के साथ साथ मुसरीघरारी, कल्याणपुर, बंगरा, ताजपुर, दलसिंहसराय, रोसड़ा, वारिसनगर, खानपुर, मथुरापुर ओपी सहित कई थानों में जब्त वाहनों की भरमार है. सबसे विकट स्थिति नगर व मुफस्सिल थानों की है. यहां करीब 200 से अधिक बाइक, दर्जनों कार, बोलेरो, स्काॅर्पियो, बस व ट्रक सालों से पड़ी सड़ रही है. अब तो जब्त वाहनों को खड़ा करने के लिए भी जगह नहीं बचा है. इसके बावजूद थानाध्यक्ष नीलामी की प्रक्रिया के पचड़े में पड़ना नहीं चाहते हैं.
क्या है नियम : नियमानुसार लावारिस अवस्था में बरामद या जब्त वाहन के छह माह बाद निस्तारण की प्रक्रिया शुरू की जानी होती है. वाहन बरामद होने पर पुलिस पहले उसे धारा 102 के तहत पुलिस रिकॉर्ड में लेती है. बाद में न्यायालय में इसकी जानकारी दी जाती है.
न्यायालय के निर्देश पर सार्वजनिक स्थानों पर पंपलेट आदि चिपका कर या समाचार पत्रों के माध्यम से उस वाहन से संबंधित जानकारी सार्वजनिक किये जाने का प्रावधान है, ताकि वाहन मालिक अपना वाहन वापस ले सकें.
जटिल होती है नीलामी प्रक्रिया :
लावारिस या किसी मामले में जब्त वाहन के निस्तारण की प्रक्रिया काफी लंबी होती है. पहले तो पुलिस थाना स्तर पर इंतजार करती है कि वाहन मालिक आकर अपना वाहन ले जाये. काफी इंतजार के बाद भी जब मालिक नहीं आता है, तब न्यायिक प्रक्रिया शुरू की जाती है. इससे काफी समय लगता है.
कांडों में जब्त वाहन की नीलामी में समस्या : जानकारों की मानें तो विभिन्न मामलों में अगर वाहन को जब्त किया जाता है, तो उसकी नीलामी सालों तक नहीं हो पाती है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, विभिन्न मामलों में जब्त वाहन के संबंध में न्यायालय के आदेश पर ही कोई कार्रवाई हो सकती है. न्यायालय में कांड का निष्पादन होने के बाद अगर वाहन का कोई दावेदार नहीं रहता है, तब उसे नीलामी की श्रेणी में रखा जाती. वैसे कुछ थानाध्यक्ष ने बताया कि नीलामी प्रक्रिया जटिल नहीं है, परंतु अनक्लेमड वाहनों की संख्या बहुत अधिक नहीं रहती है. अधिक वाहन कांडों से संबंधित रहते हैं. इसके अलावा मालखाना का प्रभार लेन-देन में भी समय लगता है, जिससे नीलामी कराने में कठिनाई होती है.
चोरी के वाहनों की अधिक संख्या : थाना परिसर में रखे हुए वाहनों में अधिकतर वाहन चोरी के हैं. इनकी बरामदगी के बाद इन्हें परिसर में रख दिया जाता है. वाहन चोरी की घटनाओं में कोर्ट से वाहन की सुर्पुदगी नहीं मिलने तक ये बदहाल हालत में थाने में ही पड़े रहते हैं. मंजूरी मिलने के बाद ही संबंधित को वाहन पुलिस
सौंपती है. लेकिन यह संबंधित मालिक को कबाड़ की स्थिति में ही मिल पाते हैं. थानों में इस तरह के सैकड़ों वाहन यूं ही पड़े हुए हैं, जिनके वारिस उन्हें अब तक लेने नहीं पहुंचे हैं. हालत यह है, कि ऐसा कोई भी माह शेष नहीं रहता.
क्या कहते हैं एसपी
पूरे राज्यभर में कहीं भी थानों में जब्त वाहनों की नीलामी की प्रक्रिया अभी नहीं हो रही है. शुरू होने पर इस जिले में भी होगी.
नवल किशोर सिंह, एसपी, समस्तीपुर
