समस्तीपुर : सोमवती अमावस्या पर सुहागिनों ने व्रत रखा. पवित्र नदियों व जलाशयों में स्नान कर विधि पूर्वक पीपल वृक्ष की पूजा-अर्चना की. कच्चे सूत से तैयार धागे के साथ वृक्ष की परिक्रमा की. इस दौरान अपने पति की लंबी उम्र की कामना की. साथ ही सुख-समृद्धि का आशीष मांगा. सोमवार को संयोग से आने वाले अमावस्या की महत्ता को समझने वाली सुहागिनों ने सूर्योदय के साथ ही इस व्रत को आरंभ कर दिया. कुछ व्रतियों ने गंगा समेत अन्य जलाशयों में स्नान किये तो कुछ ने घरों में ही निष्ठापूर्वक तैयार होकर उन मंदिरों की ओर रुख किया जहां पीपल के वृक्ष हैं.
वहां पहुंच कर बुजुर्ग महिलाओं की देखरेख में वृक्ष की पूजा कर वेड़ दिये. प्रसाद चढ़ाये. बुजुर्ग व्रतियों का कहना है कि सोमवती अमावस्या का योग संयोग से बनता है. सुहागिनों के लिए यह संयोग काफी मायने रखता है. यही वजह है कि सुहागिनों को इस तिथि को सोमवार पड़ने का इंतजार सा होता है.
महाभारत जैसे ग्रंथ में सोमवती अमावस्या को लेकर चर्चा है. इसमें स्पष्ट कहा गया है कि कौरवों की पत्नियां इस तिथि का बेसब्री से इंतजार करती रहीं. लेकिन उन्हें इस दुर्लभ तिथि को अमावस्या के संयोग को व्रत का अवसर नहीं मिल सका. बुजुर्ग व्रतियों के मुताबिक कई व्रती इसे निर्जला ही संपन्न करती हैं.
