सिंघिया. बारिश का मौसम शुरू होते ही करेह नदी का जर्जर तटबंध लोगों की नींद उड़ा देता है़ जून महीने के अंत होते होते नदी के दोनों तटबंध के बीच पानी लबालब भरा रहता है़ लोगों के बीच कभी कभी अफवाह भी फैल जाती है कि पूर्वी तटबंध टूटने वाली है़ लोगों के बीच अफरा तफरी मच जाती है़ लेकिन टूट जाती पश्चिमी तटबंध़ जिससे अचानक लोगों की करोड़ों रुपये के सामान नष्ट हो जाती है़ अब तो पश्चिमी तटबंध पर मिट्टी डालकर उंचा किया गया है़ जिससे बांध में काफी मजबुती आ गयी है़ लेकिन पूर्वी तटबंध के उपर मिट्टी नहीं दिये जाने से पूर्णत: कमजोर प्रतीत हो रहा है़ अब पूर्वी तटबंध के किनारे कई जगहों पर लोगों ने घर बना रखा है. ठठेरा का बोझा को सड़क के किनारे चौक दिया है़ जिसमें कई जगहों पर चूहा ने मिट्टी को खोदकर आर पार सुराग कर दिया है़ पूर्वी तटबंध से सटे गांव के लोगों में चिंता व्याप्त हो गया है कि यह नदी नेपाल से जुड़ी हुई है़ यहां बारिश हो या नहीं हो, उससे फर्क नहीं पड़ता़ यदि नेपाल में बारिश होगी तो यह नदी उफान पर रहेगी़ इस सुराग से पानी का रिसाव होते होते बांध टूट सकता है. जिससे भारी तबाही का मंजर बन सकता है़ स्थानीय प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रही है जिससे लोगों में आक्रोश है़
करेह नदी के पूर्वी तटबंध पर संशय
सिंघिया. बारिश का मौसम शुरू होते ही करेह नदी का जर्जर तटबंध लोगों की नींद उड़ा देता है़ जून महीने के अंत होते होते नदी के दोनों तटबंध के बीच पानी लबालब भरा रहता है़ लोगों के बीच कभी कभी अफवाह भी फैल जाती है कि पूर्वी तटबंध टूटने वाली है़ लोगों के बीच अफरा […]
