आम के फसलों में मधुआ कीट व रोग से बचाव करें किसान : डा. राय

पूसा, प्रतिनिधि . राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय के उद्यानिकी विभाग के वैज्ञानिक डा. पीके राय के अनुसार मार्च महिने में असामयिक बाटीस से फल उत्पादक मायूस है. विशेष रूप से आम के उत्पादकों के लिय इस बारिश से निजात पाने के लिय मधुआ कीट व रोग से बचाना हितकारी होगा. पछिया के साथ मिश्रित पुरवा हवा […]

पूसा, प्रतिनिधि . राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय के उद्यानिकी विभाग के वैज्ञानिक डा. पीके राय के अनुसार मार्च महिने में असामयिक बाटीस से फल उत्पादक मायूस है. विशेष रूप से आम के उत्पादकों के लिय इस बारिश से निजात पाने के लिय मधुआ कीट व रोग से बचाना हितकारी होगा. पछिया के साथ मिश्रित पुरवा हवा इस रोग का सहयोगी होता है. अविलंब किसान अपने बगीचे में आम तथा लीची के मंजरों एवं टिकोला पर 2 ग्राम सल्फेक्स या कैराथेन प्रति लीटर पानी के साथ इमिडाक्लेरोपीड 0.5 मिलि प्रति लिटर पानी और 1 मिलि प्रति 5 लीटर पानी की दर से प्लानोफीक्स हार्मोन की घोल बनाकर छिड़काव करें. ताकि मंजर में टिकोला से पूर्व होने वाले पर परागण की क्रिया को दोबारा पुन: लौटाया जा सकें. जिससे आम व लीची के उत्पादन दर को समानुपाति रखा जा सके.

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