/रफोटो संख्या : 41,42समस्तीपुर. हास्य कवि सम्मेलन में उपस्थित कवियों ने अपने मुख से शब्दों का अद्भूत संगम बिखेरा तो शहरवासी अपने आप को जोर जोर से हंसने को विवश हो गये. कवियों ने एक से एक बढकर कविता की पंक्तियों का जब जलवा बिखेरा तो उपस्थित जन समूह लोटपोट होने लगे. कवि शशिकांत यादव शशि ने हास्य कवि सम्मेलन का शुभारंभ गुरुनानक संत कबीर के पंक्तियों से शुरू की. इसके बाद कवियत्री प्रतिभा शुक्ला ने मातृ वीण वादिनी लो शरण में दास दूर से आयें हैं… जैसे माता वंदना से पटेल मैदान गुंज उठा. कवि शशिकांत ने पति पत्नी संबंध में हास्य व्यंग पेश करते हुए सभी को गुदगुदाया. कवि दिलीप शर्मा ने अपनी कविता ईश्वर सोच लो हर दुखी जीव है, कहता अंदर से जागो उठकर देखो… से देश में हो रहे घोटाले की परत दर परत को उकेरा. वहीं अन्य कवियों ने सागर मंथन का रत्न है…, ये गाय हमारी माता है…, बहुत रोते हैं हम पर दामन नम नहीं होगा…, उई मांझी, उई मांझी… जैसे रचनाओं पर खूब वाहवाहियां व तालियां बटोरी.
बहुत रोते हैं पर दामन नम नहीं होगा...
/रफोटो संख्या : 41,42समस्तीपुर. हास्य कवि सम्मेलन में उपस्थित कवियों ने अपने मुख से शब्दों का अद्भूत संगम बिखेरा तो शहरवासी अपने आप को जोर जोर से हंसने को विवश हो गये. कवियों ने एक से एक बढकर कविता की पंक्तियों का जब जलवा बिखेरा तो उपस्थित जन समूह लोटपोट होने लगे. कवि शशिकांत यादव […]
