आयी होली तो जख्म हुए ताजा

एक साल बाद भी बनी है अबूझ पहेलीमामला जोरपूरा के निशाकांड कामोरवा. एक ओर सारी दुनिया रंगों के पर्व में सराबोर हो रहा है वहीं दूसरी ओर जोरपूरा का एक परिवार न्याय के लिए मारा मारा फिर रहा है. होली आयी तो जख्म फिर हरे हो गये क्योंकि होली के दिन ही जोरपुरा में एक […]

एक साल बाद भी बनी है अबूझ पहेलीमामला जोरपूरा के निशाकांड कामोरवा. एक ओर सारी दुनिया रंगों के पर्व में सराबोर हो रहा है वहीं दूसरी ओर जोरपूरा का एक परिवार न्याय के लिए मारा मारा फिर रहा है. होली आयी तो जख्म फिर हरे हो गये क्योंकि होली के दिन ही जोरपुरा में एक ऐसी घटना घटी जिसपर रहस्य आज भी कायम है. पुलिस इस मामले की सच्चाई अबतक पता नही लगा पायी है वहीं घटना के आरोप में एक साल से बंद एक फौजी न्याय के लिए लालायित है. घटना के पूरे एक साल बीत चुके है. घटना हलई ओपी के जोरपुरा गांव में घटा था. होली के दिन एक नवविवाहिता निशा की लाश घर के पंखे से झूलते पाया गया था. घटना के लिए मृतका के देवर को आरोपित किया गया. वह भारतीय सेना में कार्यरत था. होली में छुट्टियां मनाने घर आया. उसे क्या मालूम था कि जिस भाभी को मां के समान आदर करता है उसी की हत्या का आरोप उसपर लगेगा. घटना के बाद इसकी सूचना मृतका के घर वालों को दी गयी. लाश का पोस्टमार्टम कराया गया. हालांकि पोस्टमार्टम प्रक्रिया पर भी कई सवाल उठाये गये लेकिन पुलिस उन्ही बिंदुओं पर जांच कर खानापूरी करती रही. इस मामले की जांच अब भी कई बिंदुओं पर अधूरी है. घटना की जानकारी लेने आरोपित को तीन दिनों तक पुलिस रिमांड पर रखा गया लेकिन सच्चाई सामने नहीं आ सकी. मामला चाहे जो भी रहा हो घटना पर सस्पेंस अब भी कायम है. अब जब चारों ओर ढोलक एवं मजीरे की थाप से सारा वातावरण गुलजार हो रहा है ऐसे में एक परिवार सिसकियों में वक्त गुजारने को मजबूर है.आरोपित सलाखों के पीछे बेडि़यों में जकड़ा है. लोगों को अब भी भरोसा है कि एक दिन न्याय जरूर मिलेगा.

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