मुख्य बातें
अंधापन नियंत्रण कार्यक्रम के तहत 40 लाख की लागत से बना है नेत्र विभाग का ओटी
सदर अस्पताल में दो महीनों के इंतजार के बाद शुरू होगा आंख का ऑपरेशन
समस्तीपुर : जिलावासियों को आंखों से संबंधित समस्याओं को लेकर निजी क्लिनिकों में भटकना नहीं पड़ेगा. स्वास्थ्य विभाग उन्हें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा जिला अस्पताल में ही उपलब्ध करा रही है. सदर अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड के उपरी मंजिल पर अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस नेत्र विभाग का ऑपरेशन थियेटर बनाया गया है.
बुधवार को जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम एसके दास ने नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ़ पवन कुमार एवं स्वास्थ्य प्रबंधक विश्वजीत रामानंद के साथ आई ओटी के तैयारियों का जायजा लिया. जायजा लेने के बाद अधिकारियों ने बताया कि इस नवनिर्मित शल्यकक्ष में शुक्रवार से ऑपरेशन का कार्य शुरू हो जायेगा. ओटी में अत्याधुनिक उपकरणों को इंस्टॉल किया गया है.
जिससे मरीजों को उच्च स्तरीय शल्य सेवा मिलेगा. जानकारी के अनुसार अंधापन नियंत्रण कार्यक्रम के तहत लगभग 40 लाख की लागत से इस नेत्र शल्यकक्ष को तैयार किया गया है. जिसमें भवन निर्माण के साथ-साथ अत्याधुनिक उपकरणों की खरीदारी भी शामिल हैं. मरीजों के आंख से संबंधित समस्याओं को जांचने के लिए ओटी के बगल में एक जांच रूम भी बनाया गया है.
जिसमें कंप्यूटराइज मशीनें लगायी गयी हैं. जिसकी मदद से मरीजों के आंखों का प्रेसर जांच किया जायेगा. साथ ही आंख के पर्दा का जांच, दोनों चेंबर का जांच के साथ-साथ रोगों की पहचान करने में भी मदद मिलेगी. साथ ही ऑपरेशन के दौरान खून बहना कम किया जा सके इसके लिए कॉट्री मशीन लगायी गयी है.
दो महीने से बंद था ऑपरेशन: यहां बता दें कि सदर अस्पताल में पिछले दो महीनों से आंख का ऑपरेशन नहीं हो पा रहा था. ओटी निर्माण के कारण नेत्र विभाग का शल्य कार्य बाधित हो गया था. प्रतिदिन मरीज लौट रहे थे. जानकारों की मानें तो सदर अस्पताल में हर महीने मोतियाबिंद एवं आंखों से संबंधित अन्य समस्याओं को लेकर पहुंचने वाले कम से कम एक 60 से 70 मरीजों का ऑपरेशन किया जाता रहा है. अब सुविधाओं के बढ़ जाने से मरीजों की संख्या में भी इजाफा होगा.
रह गयी हैं थोड़ी-बहुत कमियां: नेत्र शल्य कक्ष को अत्याधुनिक उपकरणों से लैस करके बनाया गया है. लेकिन इसमें कुछ और सुधार की जरूरत दिख रही है. जानकारों के अनुसार ओटी को धूल-मिट्टी से बचाव के लिए और अस्पताल प्रशासन को और प्रबंध करने होंगे. मुख्य गेट में ग्रील लगाया गया है. जो खुला हुआ है. उस ग्रील से धूल-मिट्टी प्रवेश कर जाता है. इतना ही नहीं ग्रील के नीचे से नेत्र विभाग में कुत्ते एवं बिल्ली तक प्रवेश कर जा रही हैं. जिससे मरीजों को इंफेक्शन का खतरा हो सकता है.
