कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल, पुलिस के लिए चुनौती

समस्तीपुर : समस्तीपुर कोर्ट परिसर में जिस तरह से अपराधियों ने सोमवार को ताबड़तोड़ फायरिंग की उससे अब कई सवाल खड़े होने लगे हैं. इस घटना के बाद से वकील,पेशी के लिए आए बंदी और उनके परिजन सहमे हुए है. कोर्ट परिसर में भी अब कोई सुरक्षित नहीं है. सुरक्षा व्यवस्था लचर होने के कारण […]

समस्तीपुर : समस्तीपुर कोर्ट परिसर में जिस तरह से अपराधियों ने सोमवार को ताबड़तोड़ फायरिंग की उससे अब कई सवाल खड़े होने लगे हैं. इस घटना के बाद से वकील,पेशी के लिए आए बंदी और उनके परिजन सहमे हुए है. कोर्ट परिसर में भी अब कोई सुरक्षित नहीं है. सुरक्षा व्यवस्था लचर होने के कारण लगातार इस तरह की घटनाएं घट रही हैं.

वकीलों के साथ न्यायिक पदाधिकारी, कर्मचारी और मुवक्किल भी अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. हर बार घटना के बाद कहा जाता है कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा. लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है.

समस्तीपुर कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर अधिवक्ताओं के बीच चर्चा शुरू हो गई. समस्तीपुर व्यवहार न्यायालय के मुख्य गेट पर अब तक डोर मेटल डिटेक्टर को नहीं लगाया गया है. वही कोर्ट भवन में लगे डोर मेटल डिटेक्टर बस खानापूर्ति के लिए लगे हुए. वहां पुलिस बल भी तैनात रहते है लेकिन आने जाने वालों को डोर मेटल डिटेक्टर से गुजर कर जाने की हिदायत नहीं देते. व्यवहार न्यायालय के मुख्य गेट पर सुरक्षा के लिए गार्ड तो तैनात किया गया है, लेकिन शायद ही कभी जांच पड़ताल होती हो.
असुरक्षा के कारण कई बार कोर्ट परिसर में अधिवक्ता व मुवक्किल के बीच मारपीट की घटना भी किसी से छिपी नहीं हैं. अधिवक्ताओं का कहना है कि न्यायालय परिसर में आने जाने के रास्तों पर गेट तो लगे हुए हैं लेकिन वहां जांच की कोई व्यवस्था नहीं है. एक दो वैसे रास्ते भी हैं जहां से लोग बेधड़क होकर कोर्ट परिसर में प्रवेश करते रहते हैं.
ऐसे में यहां भी कभी ऐसी अनहोनी हो सकती है. हालांकि कोर्ट परिसर की सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन को पूर्व में जिला जज कई बार अवगत करा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई व्यवस्था नहीं की गयी है. बताते चलें कि विगत वर्ष अगस्त माह में पटना हाईकोर्ट ने सीतामढ़ी कोर्ट परिसर में पेशी के लिए लाए गए संतोष झा की गोली मारकर हत्या की घटना पर चिंता जाहिर की थी.
कोर्ट परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक कमेटी का गठन करने का निर्णय लिया गया था, ताकि सुरक्षा का बेहतर प्रबंध किया जा सके. इसके बाद न्यायालयों में जवानों को मुस्तैद कर व सीसीटीवी लगा सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के दावे किए जाने लगे.

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