समस्तीपुर : करीब 24 साल पहले गायब हुए एक एएसआइ को पुलिस महकमा ढूंढ़ तो नहीं पाया, उसके परिवार को कोई सरकारी लाभ भी नहीं मिल रहा है. ऐसा तब है जबकि सरकारी दस्तावेजों में उसे मृत मान लिया गया है. हाल ही में पटना हाइकोर्ट ने भी उक्त एएसआइ के परिजन को सरकारी लाभ देने का आदेश दिया है. कोर्ट के आदेश के भी दो माह बीत चुके हैं.
समस्तीपुर के हथौड़ी थाना के महेशवाड़ा गांव के निवासी रामविलास राम उर्फ रामनंदन सिंह कटिहार के शालीमारी ओपी में एएसआइ के पद पर तैनात थे. 1995 में जरूरी काम के लिए कटिहार के लिए निकले. इसके बाद उनका कोई पता नहीं चला. उनकी पत्नी कौशल्या देवी गरीबी व अभाव में छह की परवरिश करती रही.
पूरा परिवार रामविलास को खोजने के लिए विभाग से गुहार लगाता रहा. रामविलास राम के पुत्र संतोष कुमार बताते हैं कि 2002 में विभाग ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. लेकिन, परिवार वालों को न सेवांत लाभ मिला और न ही पेंशन व अनुकंपा. इस बीच बच्चों की जिम्मेवारी का बोझ उठाते-उठाते एएसआई की पत्नी का मानसिक संतुलन भी बिगड़ गया. बच्चे जैसे-तैसे पलते रहे.
जब बड़ा पुत्र संतोष कुमार बालिग हुआ, तो उसने पिता की खोज-खबर लेनी शुरू की. उसने पहले तो कटिहार जाकर लाभ के लिए विभाग से गुहार लगायी. उसकी किसी ने नहीं सुनी. थक-हार कर उसने हाइकोर्ट में सीडब्ल्यूजे 15290/19 दायर किया. कोर्ट ने परिवार की पीड़ा सुनकर गत 29 जुलाई को आदेश जारी किया. इसमें एएसआइ के परिवार को सभी लाभ देने का आदेश जारी किया गया. लेकिन, आदेश का पालन नहीं हुआ.
जांच को कई बार महेशवाड़ा आ चुकी है टीम
लापता एएसआइ रामविलास राम उर्फ रामनंदन सिंह के पुत्र संतोष का कहना है कि वर्ष 2004 और 2005 में कटिहार के तत्कालीन एसपी ने लाभ के लिए आदेश जारी भी किया था. अब तक जांच टीम कई बार महेशवाड़ा आ चुकी है. सारी कागजी कार्रवाई पूरी होने के बावजूद उनके परिवार को कोई लाभ नहीं दिया गया. संतोष की मानें तो दो दिन पूर्व भी हथौड़ी पुलिस ने पंचायत के मुखिया और सरपंच से इस मामले को लेकर पूछताछ की है.
