नीचे खिसका भू-जल स्तर, बोरिंग और चापाकल फेल, सूखने लगे हैं हलक

रोसड़ा में पेयजल संकट गहराया रोसड़ा : तेज धूप व भीषण गर्मी के बीच इलाके में पेयजल संकट गहराने लगा है. गर्मी व सूखे के चलते भूजलस्तर तेजी से नीचे खिसकने के कारण चौर, बहियार, कुएं, तालाब आदि पारंपरिक जल स्रोत सूख गए हैं. भूजल स्तर सामान्य से 8 से 10 फुट नीचे खिसक जाने […]

रोसड़ा में पेयजल संकट गहराया

रोसड़ा : तेज धूप व भीषण गर्मी के बीच इलाके में पेयजल संकट गहराने लगा है. गर्मी व सूखे के चलते भूजलस्तर तेजी से नीचे खिसकने के कारण चौर, बहियार, कुएं, तालाब आदि पारंपरिक जल स्रोत सूख गए हैं. भूजल स्तर सामान्य से 8 से 10 फुट नीचे खिसक जाने के कारण चापाकल व बोरिंग ने भी पानी छोड़ना शुरू कर दिया है. पारंपरिक जल स्रोतों के सूखने से भीषण गर्मी में आम लोगों को जहां पेयजल के लिए परेशान होना पड़ रहा है. जानवरों व पालतू मवेशियों के लिए भी पानी की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है. प्यास बुझाने के लिए जंगली जानवर रिहायशी इलाके में घुसने लगे हैं. ऐसे हालात में शहरी व ग्रामीण इलाके में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है. शहरी क्षेत्र में तो लोग पीने के लिए बोतल, बोरिंग व सप्लाय के पानी से किसी तरह काम चला रहे हैं.
परंतु ग्रामीण इलाके में लोगों को पीने के लिए भी शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है. पेयजल के लिए शहरी व ग्रामीण इलाके में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग द्वारा लगवाए गए अधिकांश चापाकल खराब पड़े हैं. वाटर लेवल नीचे चले जाने के कारण चालू चापाकलों से भी गंदा पानी निकलने लगा है. शहर से सटे थतिया, सहियार, दामोदरपुर, बटहा, गोविंदपुर, मिर्जापुर, काला मंजर, महुली, खैरा दरगाह, ढ़रहा, भिरहा, ढ़ट्ठा, लालपुर, मोतीपुर आदि गांवों में भी हैण्डपम्पों ने पानी देना कम कर दिया है.
इन गांवों के लोगों का कहना है कि सामान्य दिनों में वाटर लेवल 20 से 22 फुट नीचे रहता है. भीषण गर्मी के चलते वाटर लेवल खिसककर 30 से 32 फुट नीचे चला गया है. इस परिस्थिति में सिर्फ सिलेंडर लगे चापाकलों से ही पीने लायक पानी निकल पा रहा है. हलाकि कुछेक गांवों में नल जल योजना से पानी सप्लाई होने से पेयजल की खास समस्या नहीं है. फिर भी पेयजल के लिए लोगों की परेशानी इस भीषण गर्मी में कम होती नजर नहीं आ रही है.
कहते हैं अधिकारी
लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण प्रमंडल रोसड़ा के कार्यपालक अभियंता ने बताया कि पारंपरिक जल स्रोतों के सूखने व बारिश नहीं होने के चलते भूजल स्तर सामान्य से नीचे चला गया है. खराब पड़े चापाकलों का सर्वेक्षण करवा ठीक करवाया जा रहा है.

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