अपराधियों का तांडव, बौनी नजर आने लगी पुलिस
समस्तीपुर : जिले में अपराधियों के फन फिर से तनने लगे हैं. उनके लिए न तो कोई समय की पाबंदी है और न ही जगह की. दिन दहाड़े सरेशाम घटना को अंजाम देकर निकल जाते हैं. पुलिस की सारी व्यवस्था इन शातिर अपराधियों के सामने बौनी साबित हो रही है. अपराधी इतने बेखौफ नजर आने […]
समस्तीपुर : जिले में अपराधियों के फन फिर से तनने लगे हैं. उनके लिए न तो कोई समय की पाबंदी है और न ही जगह की. दिन दहाड़े सरेशाम घटना को अंजाम देकर निकल जाते हैं. पुलिस की सारी व्यवस्था इन शातिर अपराधियों के सामने बौनी साबित हो रही है. अपराधी इतने बेखौफ नजर आने लगे हैं कि एक घटना सुलझती नहीं है कि दूसरी घटना को अंजाम देकर पुलिस के लिए एक नयी मुश्किलें पैदा कर देते हैं. जब तक पुलिस घटनाओं की प्राथमिकी दर्ज कर उसमें आरोपित किये गये लोगों को पकड़ने की जद्दोजहद करते रहते हैं
तब तक मौत के घाट उतारने वाले मुख्य शूटर न जाने किस बिल में जा छुपते हैं जहां से उन्हें बाहर निकालना पुलिस के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रही है. पिछले 72 घंटे के दौरान जिले में चार चार घटनाओं को अंजाम देकर अपराधियों ने अपनी मंशा का इजहार सा कर दिया है. बीते शुक्रवार की सुबह हसनपुर में अहिलवार पंचायत की मुखिया ममता कुमारी के ससुर राजद नेता हरेराम यादव की बाइक सवार अपराधियों ने गोलियों से भून दिया. इस घटना में पुलिस ए क आरोपित को गिरफ्तार कर चुकी है.
पुलिस मुख्य शूटर की पहचान के लिए मगजमारी कर रही थी कि कुछ ही घंटे बाद पता चला कि बिथान में अज्ञात लाश मिली. छानबीन के दौरान पता चला कि उसकी भी अपराधियों ने गोली मार कर हत्या कर दी. लाश को मुरौल चौर में फेंक कर पुलिस को नयी चुनौती पेश कर दी. छानबीन के दौरान मृतक के शर्ट पर लगे स्टीकर से उसकी पहचान हुई. वह सहरसा जिले के सलखुआ थाना का रहने वाला अभिकरण यादव है. वह मवेशी का व्यापार करता था. माना जा रहा है कि वह इसी सिलसिले में बिथान आया था और अपराधियों ने लूटपाट के बाद उसकी हत्या कर दी. इस घटना में भी पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं.
इसी बीच रविवार को हसनपुर के ही सिरसिया के पंचायत समिति सदस्य महेंद्र मुखिया के पुत्र कमल मुखिया की गोली मार कर हत्या कर दी. वैसे कमल का दामन भी दागदार रहा है. इस घटना के महज कुछ ही घंटों के बाद देर संध्या ताजपुर में ठगवा चौक के निकट अपराधियों ने रजवा पंचायत के मुखिया मो मुर्तुजा के भतीजे मो आरजू को गोली मार दी. वह जीवन और मौत से जूझ रहा है. इस मामले में भी पुलिस के हाथ अब तक कुछ नहीं लगे हैं. इसके अलावा कई घटनाएं और भी हुई हैं, जो इन घटनाओं के आगे बौनी है. इससे पता चलता है कि पुलिस महकमे में कहीं न कहीं चूक हो रही है. इस पर समय रहते ध्यान देने की जरूरत है, ताकि अपराधियों के फन को समय रहते एक बार फिर से कुचला जा सके. ताकि, आम लोग दहशत की बजाय सहज जीवन जी सकें.
कहां सो रहा पुलिस का खुफिया तंत्र
जिले को अपराधमुक्त रखने की जिम्मेदारी संभालने वाली पुलिस अपनी व्यवस्था को लेकर खुफिया तंत्र रखती है. कभी इसी तंत्र के माध्यम से पुलिस बड़ी-बड़ी घटनाओं को अंजाम देने से पहले ही अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया करती थी. कई उदाहरण हैं जब हत्या तक की नीयत से पहुंचे अपराधियों को पहले ही दबोच लिया गया. लेकिन बदलते जमाने के इस युग की पुलिस को क्या हो गया है. बड़ी-बड़ी घटनाओं के सुराग अर्से तक नहीं मिल पाते हैं.
कुछ कांडों में हमलावरों की पहचान कर ली गयी है. पुलिस उस तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है. जल्द ही उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचाया जायेगा. हर हाल में अपराध पर नियंत्रण किया जायेगा.
आमिर जावेद, प्रभारी एसपी, समस्तीपुर