समस्तीपुर : किसी भी देश का विकास उसकी मातृभाषा की उन्न्नति के बगैर अधूरी है. हम देश दुनिया के किसी भी कोने मे जायें हमें अपनी मातृभाषा में ही बातचीत करनी चाहिए. ये बातें आचार्य विमलानंद अवधूत ने आनंदमार्ग की ओर से शनिवार को पांच दिवसीय कार्यक्रम के अवसर पर सैंपोजियम में संबोधित करते हुये कही.
उन्होंने कहा कि अगर आप की मातृभाषा मैथिली है तो उसी भाषा में बात व्यवहार करें. इस अवसर पर संबोधित करते हुये अन्य वक्ताओं ने स्थानीय मुद्दे को उठाया. कहा कि आज किस कारण से हमारे कृषि उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है. हम अपने बोये आलू को 5 रुपये प्रति किलो बेचने को विवश हंै जबकि यहीं आलू व आलू से बने उत्पाद 400 से 500 रुपये प्रति किलो बजार में बेचे जा रहे हैं. यहां कृषि आधारित उद्योग नहीं लग पा रहे हैं. ऐसे में किसानों का शोषण हो रहा है. इससे पहले पूसा के बथुआ में नये कार्यालय का उद्घाटन भी किया गया.
अध्यक्षता एमपी सिंह ने की. मौके पर आचार्य मंत्र सिद्धानंद अवधूत, डा. नवल किशोर सिंह, सत्येंद्र प्रसाद, रामेदव मिश्रा आदि उपस्थित थे.
