थाने में खड़ी है गाड़ी, जारी किया प्रदूषण सर्टिफिकेट

गड़बड़ी. सर्टिफिकेट लेकर एमवीआइ आॅफिस आने पर खुली पोल समस्तीपुर : वाहनों के प्रदूषण जांच के नाम पर इन दिनों जम कर गड़बड़ी की जा रही है. जिला परिवहन विभाग स्थित एमवीआइ कार्यालय में वाहन संचालन जब थाने में जब्त वाहन को छुड़वाने आये तो इसका खुलासा हुआ. मामला बिथान थाना क्षेत्र का है. 16 […]

गड़बड़ी. सर्टिफिकेट लेकर एमवीआइ आॅफिस आने पर खुली पोल

समस्तीपुर : वाहनों के प्रदूषण जांच के नाम पर इन दिनों जम कर गड़बड़ी की जा रही है. जिला परिवहन विभाग स्थित एमवीआइ कार्यालय में वाहन संचालन जब थाने में जब्त वाहन को छुड़वाने आये तो इसका खुलासा हुआ. मामला बिथान थाना क्षेत्र
का है.
16 सितंबर 2016 को संबंधित थाना क्षेत्र में दुर्घटना व अन्य धाराओं के तहत ऑटो संख्या बीआर 09एम 2689 को बिथान थाना ने जब्त कर लिया. वाहन जब्त होने के बाद से लगातार थाना पर ही है. इधर, मथुरापुर स्थित नेशनल वाहन प्रदूषण जांच केंद्र ने 24 सितंबर को बिना वाहन देखे ही उसका प्रदूषण सर्टिफिकेट जारी कर दिया.
जब एमवीआई आर.रंजन ने उक्त सर्टिफिकेट को देखा तो वे भी सकते में आ गए.
बता दें कि प्रदूषण जांच अधिनियम के अनुसार वाहन के जांच के बाद ही सर्टिफिकेट निर्गत करना है. लेकिन, प्रदूषण केंद्र संचालन इन नियमों को ताक पर रखकर बिना वाहन के ही जांच का प्रमाण पत्र जारी कर दे रहे हैं. इधर, परिवहन विभाग भी इस बात से बिलकुल बेखबर है.
परिवहन विभाग : जांच केंद्र की लापरवाही उजागर
खर्च बचाने को फैला रहे प्रदूषण
वाहन संचालक गाड़ी में खराबी आने पर उसकी मरम्मत कराने के बजाये प्रदूषण केंद्र में कुछ अधिक पैसे देकर सर्टिफिकेट खरीद लेते हैं. मैकेनिक की मानें तो गाड़ी में इंजन में खराबी आने पर वह अधिक धुआं उत्पन्न करने लगता है. इंजन की मरम्मती कराने में 3 से 30 हजार तक रुपये खर्च होते हैं. ऐसे में प्रदूषण जांच केंद्र को ही अधिक पैसे देकर वे ओके का सर्टिफिकेट जारी करवा लेते हैं. प्रदूषण फेल होने पर पहली बार पकड़े जाने पर 1000 रूपये जुर्माना का प्रावधान है.जबकि दूसरी बार पकड़े जाने पर यह राशि दोगुनी हो जाती है. इससे बचने के लिए संचालक कुछ अधिक पैसे देकर प्रदूषण रहित सर्टिफिकेट की जारी करा लेते हैं.
लाइसेंस रद्द करने की अनुशंसा की जायेगी
मामला संज्ञान में आया है. एमवीआइ को जांच का निर्देश दिया जा रहा है. संबंधित जांच केंद्र के संचालक से स्पष्टीकरण पूछा जायेगा. साथ ही परिवहन विभाग से जांच केंद्र का लाइसेंस रद्द करने की अनुशंसा की जायेगी.
लालबाबू सिंह,डीटीओ, समस्तीपुर
हजारों की संख्या में हो सकते हैं ऐसे मामले
बिना वाहन देखे सर्टिफिकेट जारी करने का मामला जिला में हजारों की संख्या में होने का अनुमान परिवहन विभाग लगा रहा है. विभाग जांच केंद्रों पर अब निगरानी करने की बात कह रहा है. ऐसे और मामले मिलने का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सर्टिफिकेट पर ओके लिखे होने के बावजूद वाहन धुआं उगल रहे हैं. बता दें कि सभी संचालकों को प्रत्येक छ: माह पर अपने वाहन का प्रदूषण जांच कराना अनिवार्य है. जिले में लगभग प्रत्येक दिन 55 से 60 वाहनों का प्रदूषण जांच होता है. इससे गड़बड़ी की संख्या आ अंदाजा लगाया जा सकता है.

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