चचरी पुल का एप्रोच पथ बहने से 40 किलोमीटर दूरी तय करने को विवश हो रहे ग्रामीण

कोसी के जलस्तर में धीरे-धीरे होने लगी वृद्धि, तटबंध के अंदर डेढ़ दर्जन गांवों का प्रखंड व जिला मुख्यालय से टूटा संपर्क

कोसी के जलस्तर में धीरे-धीरे होने लगी वृद्धि, तटबंध के अंदर डेढ़ दर्जन गांवों का प्रखंड व जिला मुख्यालय से टूटा संपर्क नवहट्टा . कोसी पूर्वी व पश्चिमी तटबंध के अंदर प्रखंड क्षेत्र के सात पंचायत अवस्थित हैं. जिसके आवागमन के लिए चचरी पुल वरदान से कम नहीं साबित होता है. लेकिन कोसी नदी के जलस्तर बढ़ने से चचरी पुल के एप्रोच पथ बहने से चचरी पुल के रास्ते आवागमन पूरी तरह ठप हो गयी है. असेय केदली घाट पर ग्रामीणों के आर्थिक सहयोग से बने आठ लाख के लागत से चचरी पुल नवंबर माह से लेकर मई माह तक के लिए वरदान साबित होता है. लेकिन शुक्रवार को चचरी पुल के एप्रोच पथ बह जाने से प्रखंड मुख्यालय सात किमी की दूरी के बदले 40 किमी महिषी के बलुआहा पुल के रास्ते आवागमन करना मुसीबत बन गया है. वहीं असेय केदली घाट पर नाव के सहारे आवागमन में दो से तीन नदी पार करने में दो से तीन घंटा का समय व्यतीत करना पर रहा है. कोसी नदी के असेय केदली घाट पर 12 सौ फीट लंबा चचरी पुल लोगों के लिए बडा सहारा है. प्रखंड मुख्यालय से कैदली पंचायत, बकुनियां पंचायत, हाटी पंचायत, डरहार पंचायत, नौला पंचायत, सतौर व शाहपुर पंचायत, केदली पंचायत सहित तटबंध क अंदर 24 राजस्व ग्राम के लोगोें का प्रखंड मुख्यालय व जिला मुख्यालय से सीधा संपर्क भंग हो गया. 19 वर्ष से पुल निर्माण की हो रही मांग वर्ष 2005 से ही कोसी नदी के असेय केदली घाट पर पुल बनवाने की मांग हो रही है. लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण असेय केदली घाट पर पुल निर्माण की बात आगे बढ़ नहीं पायी. यही नहीं तटबंध के अंदर सात पंचायत के लोगों के आवागमन के लिए पक्की सड़क तक नहीं बन सकी. इस कारण लोग आज भी सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित होकर अपने घरों में छह माह तक कैद रहने को विवश हो जाते हैं. सरकार की तरफ से नहीं दिया जा रहा ध्यान ग्रामीणों का कहना है कि 19 सालों से सरकार से मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने की मांग की जा रही है. लेकिन सरकार की तरफ से कोई ध्यान नहीं दिया गया है. कोसी नदी के असेय केदली घाट पर 2005 से ही पुल बनवाने की मांग की जा रही है. स्थानीय प्रतिनिधियों के पास कई बार बात रखी गयी. लेकिन उन्होंने नजरअंदाज कर दिया. जिस वजह से असेय केदली घाट पर पुल निर्माण नहीं हो सका. गांव के लोगों के लिए आने-जाने की सड़क भी नहीं बन सकी.

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