मुआयना करने पहुंची सीओ | Prabhat Khabar Network

सहरसा: आरण में मयूर अभ्यारण्य के लिए सरकारी जमीन की तलाश शुरू, डीएम के आदेश पर गांव पहुंचीं सीओ शिखा सिंह

सहरसा के आरण गांव में राष्ट्रीय पक्षी मोरों के संरक्षण के लिए प्रशासन ने मयूर अभ्यारण्य बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है. प्रभात खबर की प्रमुखता से छपी खबर के बाद जिला प्रशासन ने सक्रियता दिखाते हुए जमीन की तलाश शुरू कर दी है. इससे ग्रामीणों में नई उम्मीद जगी है.

सहरसा जिले के आरण गांव में मोर दशकों से रह रहे हैं. अब प्रशासन उनके संरक्षण के लिए पूरी सक्रियता दिखा रहा है. प्रभात खबर में प्रमुखता से खबर प्रकाशित होने के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित संज्ञान लिया है. जिलाधिकारी ने साफ निर्देश दिए हैं कि अंचलाधिकारी (सीओ) शिखा सिंह दलबल के साथ खुद आरण गांव पहुंचीं और प्रस्तावित मयूर अभ्यारण्य (पीकॉक सेंचुरी) के निर्माण के लिए बिहार सरकार की ज़मीन की तलाश शुरू कर दी है. प्रशासनिक सक्रियता से वर्षों से मोरों की सुरक्षा की मांग कर रहे ग्रामीणों में नई उम्मीद जगी है.

प्रभात खबर में प्रकाशित खबर | Prabhat Khabar Network

2 एकड़ ज़मीन की ज़रूरत, ग्रामीणों से भी मांगी गई मदद

गांव में मुआयना करने पहुंचीं सीओ शिखा सिंह ने बताया कि आरण में मयूर अभ्यारण्य विकसित करने के लिए करीब दो एकड़ सरकारी भूमि की आवश्यकता है. अंचल प्रशासन द्वारा राजस्व अभिलेखों और स्थल पर बिहार सरकार की सरकारी और उपयुक्त ज़मीन की उपलब्धता की गहन पड़ताल की जा रही है. सीओ ने स्थानीय ग्रामीणों से भी अपील की है कि यदि उनके संज्ञान में उपयुक्त सरकारी भूखंड हो, तो वे प्रशासन को तत्काल सूचित करें. उन्होंने आश्वस्त किया कि ज़मीन चिन्हित होते ही विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर जिलाधिकारी को सौंपा जाएगा.

सहरसा: आरण गांव बना राष्ट्रीय पक्षी मोरों का अनूठा बसेरा, सीएम के आश्वासन के 10 साल बाद भी संरक्षण की नीति का इंतजार

घरों के आंगन और बगीचों में टहलते हैं सैकड़ों मोर, जंगली जानवरों का डर

आरण गांव की अनूठी पहचान यह है कि यहां वर्षों से सैकड़ों की संख्या में मोर इंसानों के साथ सह-अस्तित्व में रह रहे हैं. मोर गांव के घर-आंगन, दरवाजों, खलिहानों और आम-लीची के बगीचों में बेखौफ विचरण करते दिखते हैं. हालांकि, किसी सुरक्षित बाउंड्री और अभ्यारण्य के अभाव में इन राष्ट्रीय पक्षियों पर सियार, जंगली कुत्तों व अन्य हिंसक जानवरों का खतरा निरंतर बना रहता है. कई बार जंगली जानवर मोरों के अंडों और नवजात बच्चों को अपना शिकार बना लेते हैं, जिससे इनकी आबादी पर संकट मंडराता रहा है.

विचरण करते मयूर | Prabhat Khabar Network

खबर छपने के बाद जदयू नेता ने मुख्यमंत्री को लिखा था पत्र

आरण में मोरों के प्राकृतिक वास की रक्षा को लेकर प्रभात खबर द्वारा आवाज़ उठाए जाने के बाद जदयू नेता किशोर कुमार सिंह ने मामले को उच्च स्तर पर उठाया था. उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आरण को संरक्षित पक्षी क्षेत्र घोषित करने और ठोस नीति बनाने की मांग की थी. इसके बाद प्रशासनिक महकमे ने फाइल को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी.

विचरण करते मयूर | Prabhat Khabar Network

ग्रामीणों में उत्साह, मयूर गांव के रूप में मिलेगी राष्ट्रीय पहचान

सीओ के गांव पहुंचने पर सामाजिक कार्यकर्ता कृष्ण कुमार कुंदन, अमित कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर उपस्थित रहे. ग्रामीणों ने बताया कि, "अगर यहाँ अभ्यारण्य बन गया तो यह सिर्फ मोरों के लिए ही नहीं, बल्कि हमारे गाँव के लिए भी बहुत बड़ी बात होगी". उन्होंने कहा कि इससे आरण गांव इको-टूरिज्म के नक्शे पर एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में भी उभरेगा.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By लालबहादुर कुमार

पत्रकारिता में 14 वर्षों का अनुभव. प्रिंट मिडिया में वर्ष 2012 से लगातार कार्यरत हैं. वर्तमान में मैं सहरसा जिले के सत्तरकटैया प्रखंड में समाचार संकलन के कार्य में जुटे हैं.उनकी रूचि शिक्षा एवं समाज सेवा है.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >